भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 378, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 378

उषा विस्तृत आकाश के पूर्व भाग में जन्म लेकर दिशाओं का ज्ञान कराती है. धरती और आकाश उसके पिता हैं. उषा इन दोनों के मध्य में स्थित होकर अपने तेज से अत्यंत विस्तीर्ण रूप से प्रसिद्ध हुई है. (५) एवेदेषा पुरुतमा दृशे कं नाजामिं न परि वृणक्ति जामिम्. अरेपसा तन्वा३ शाशदाना नार्भादीषते न महो विभाती.. (६) इस प्रकार विस्तार को प्राप्त हुई उषा अपने जाति वाले देवों और विजातीय मानवों सभी को प्राप्त होती है, जिससे वे सुखपूर्वक देख सकें. अपने निर्मल शरीर के कारण स्पष्ट होती हुई उषा छोटे बड़े किसी के पास से नहीं हटती. (६) अभ्रातेव पुसं एति प्रतीची गर्तारुगिव सनये धनानाम्. जायेव पत्य उशती सुवासा उषा हस्रेव नि रिणीते अप्सः.. (७) उषा बिना भाई की बहिन के समान पश्चिम की ओर मुख करके चलती है तथा पतिहीना नारी के समान प्रकाश रूप धन प्राप्त करने के लिए आकाश में चढ़ती है. उषा पति को प्रसन्न करने वाली पत्नी के समान सुंदर वस्त्र पहनकर हास्य द्वारा अपने दांतों का प्रदर्शन करती है. (७) स्वसा स्वस्रे ज्यायस्यै योनिमारैग्पैत्यस्याः प्रतिचक्ष्यैव. व्युच्छन्ती रश्मिभिः सूर्यस्याञ्ज्यङ्क्ते समनगा इव व्राः.. (८) निशा रूपी छोटी बहिन उषा रूपी बड़ी बहिन को अपना स्थान देकर चली जाती है. सूर्य की किरणों से अंधकार का नाश करती हुई यह उषा बिजलियों के समान संसार में प्रकाश करती है. (८) आसां पूर्वांसामहसु स्वसृणामपरा पूर्वामभ्येति पश्चात्. ताः प्रत्नवन्नव्यसीनूनमस्मे रेवदुच्छन्तु सुदिना उषासः.. (९) सभी उषाएं परस्पर बहिनें हैं एवं एकदूसरी के पीछे चलती हैं. आने वाली उषाएं प्राचीन उषाओं के समान सुदिन लावें एवं हमें बहुधनसंपन्न करें. (९) प्र बोधयोषः पृणतो मघोन्यबुध्यमानाः पणयः ससन्तु. रेवदुच्छ मघवद्भ्यो मघोनि रेवत्स्तोत्रे सूनृते जारयन्ती.. (१०) हे धनवती उषा! हवि देने वालों को जगाओ तथा लालची पणियों को सोने दो. तुम हवियुक्त यजमानों को समृद्ध बनाओ. तुम सुंदर नेत्री हो. तुम सब प्राणियों को क्षीण करती हो, पर अपने यजमान को उन्नत बनाओ. (१०) अवेयमश्वैद्युवतिः पुरस्ताद्युङ्क्ते गवामरुणानामनीकम्. ebook converter DEMO Watermarks*