भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 381, कुल 1855 में से

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दानशील राजा ने मुझ कक्षीवान् से प्रार्थना की. मैंने उससे सौ स्वर्ण मुद्राएं, सौ घोड़े एवं सौ बैल स्वीकार किए. इस दान से राजा ने स्वर्गलोक में स्थायी यश प्राप्त कर लिया. (२) उप मा श्यावा: स्वनयेन दत्ता वधूमन्तो दश रथासो अस्थु:. षष्टि: सहस्रमनु गव्यमागात्सनत्कक्षीवाँ अभिपित्वे अह्नाम्.. (३) स्वनय ने मुझे सफेद घोड़ों वाले दस रथ दिए. उन में वधुएं बैठी थीं. रथों के पीछे एक हजार साठ गाएं चल रही थीं. मैंने यह सब स्वीकार करके अगले ही दिन अपने पिता को दे दिया. (३) चत्वारिंशद्दशरथस्य शोणा: सहस्रस्याग्रे श्रेणिं नयन्ति. मदच्युतः कृशनावतो अत्यान्कक्षीवन्त उद्मृक्षन्त पज्राः.. (४) पीछे हजार गाएं हैं. आगे दस रथों में लाल रंग के चालीस घोड़े पंक्तिबद्ध होकर चलते हैं. घास लिए हुए कक्षीवान् के अनुचर घोड़ों को मलने लगे. स्वर्णाभूषणों से युक्त वे मतवाले घोड़े शत्रु का गर्व नष्ट करते हैं. (४) पूर्वामनु प्रयतिमा ददे वस्त्रीन्युक्ताँ अष्टावरिधायसो गाः. सुबन्धवो ये विश्या इव व्रा अनस्वन्तः श्रव ऐषन्त पज्राः.. (५) हे भाइयो! मैंने पूर्वदान के अनुसार तुम्हारे लिए तीन और आठ रथ तथा बहुमूल्य गाएं स्वीकार की हैं. अंगिरा के सभी पुत्र प्रजाओं के समान परस्पर अनुराग युक्त होकर हव्य अन्न से भरी गाड़ियों सहित यश की इच्छा करें. (५) आगधिता परिगधिता या कशीकेव जङ्गहे. ददाति मह्यं यादुरी याशूनां भोज्या शता.. (६) भावयव्य ने अपनी पत्नी लोमशा को लक्ष्य करके कहा—“जिस प्रकार नकुली अपने पति से चिपटी रहती है उसी प्रकार यह संभोग-योग्य युवती आलिंगन करने के पश्चात् चिरकाल रमण करती है. यह रेतोयुक्त रमणी मुझे सैकड़ों भोग प्रदान करती है.” (६) उपोप मे परा मृश मा मे दभ्राणि मन्यथाः. सर्वाहमस्मि रोमशा गन्धारीणामिवाविका.. (७) लोमशा पति से कहती है—“समीप आकर मेरा स्पर्श करो. मेरे अंगों को अल्प मत समझो. मैं गंधार देश की भेड़ के समान संपूर्ण अवयव वाली एवं रोमयुक्त हूं.” (७) सूक्त—१२७ देवता—अग्नि अग्निं होतारं मन्ये दास्वन्तं वसुं सूनुं सहसो जातवेदसं विप्रं न जातवेदसम्. ebook converter DEMO Watermarks*