ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 389, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंपाहि न इन्द्र सुष्टुत स्रिधोऽवयाता सदमिद्दुर्मतीनां देवः सन्दुर्मतीनाम्. हन्ता पापस्य रक्षसस्त्राता विप्रस्य मावतः. अधा हि त्वा जनिता जीजनद्वसो रक्षोहणं त्वा जीजनद्वसो.. (११) हे शोभन स्तुतियों से युक्त इंद्र! हमें दुःखद पापों से बचाओ, क्योंकि तुम दुष्ट राक्षसों की सदा अवनति करने वाले हो. तुम हमारी स्तुतियों से प्रसन्न होकर दुर्बुद्धि यज्ञबाधकों को पराजित करो. तुम फल प्रतिबंधक पाप के घातक तथा हमारे समान मेधावी यजमानों के रक्षक हो. हे निवास हेतु इंद्र! तुम्हें सबके जन्मदाता ने इसीलिए उत्पन्न किया है. हे निवासदाता! तुम राक्षसों के विनाश के लिए उत्पन्न हुए हो. (११) सूक्त—१३० देवता—इंद्र एन्द्र याह्युप नः परावतो नायमच्छा विदथानीव सत्पतिरस्तं राजेव सत्पतिः. हवामहे त्वा वयं प्रयस्वन्तः सुतेसचा. पुत्रासो न पितरं वाजसातये मंहिष्ठं वाजसातये.. (१) हे इंद्र! यज्ञशाला में ऋत्विजों के पालक यजमान के समान, अस्ताचल को जाने वाले नक्षत्रेश चंद्र के समान एवं सम्मुख उपस्थित सोम के समान स्वर्ग से हमारे समीप आओ. जिस प्रकार पुत्र अन्न भक्षण के लिए पिता को बुलाते हैं, उसी प्रकार हम भी सोमरस निचोड़ जाने पर तुम्हें बुलाते हैं. हम ऋत्विजों के साथ महान् इंद्र को हव्य स्वीकार करने के लिए बुलाते हैं. (१) पिबा सोममिन्द्र सुवानमद्रिभिः कोशेन सिक्तमवतं न वंसगस्तातृषाणो न वंसगः. मदाय हर्यताय ते तुविष्माय धायसे. आ त्वा यच्छन्तु हरितो न सूर्यमहा विश्वेव सूर्यम्.. (२) हे शोभन गति संपन्न इंद्र! जिस प्रकार प्यासा बैल जल पीता है, उसी प्रकार तुम तृप्ति, पराक्रम, महत्त्व एवं आनंद के लिए पत्थर द्वारा पीसकर निचोड़े गए एवं जल द्वारा शोधित सोमरस को पिओ. हरि नाम के घोड़े जिस प्रकार सूर्य को बुलाते हैं, उसी प्रकार तुम्हारे घोड़े तुम्हें सोमरस पीने के लिए लावें. (२) अविन्दद्दिवो निहितं गुहा निधिं वेर्न गर्भं परिवीतमश्मन्यनन्ते अन्तरश्मनि. व्रजं वज्री गवामिव सिषासन्नङ्गिरस्तमः. अपावृणोदिष इन्द्रः परीवृता द्वार इषः परीवृताः.. (३) जिस प्रकार कबूतरी दुर्गम स्थान में अपने बच्चों को रखकर उस अपरिचित स्थान को खोज लेती है, वैसे ही इंद्र ने अत्यंत गुप्त स्थान में रखा हुआ तथा पत्थरों के ढेर से घिरा हुआ सोम स्वर्ग में प्राप्त किया. पणियों ने गायों को गोशाला में बंद कर दिया था. अंगिराओं में श्रेष्ठ ebook converter DEMO Watermarks*