भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 395, कुल 1855 में से

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तुम्हारा वज्र शत्रुओं को समस्त उपायों से नष्ट करता है. (६) सूक्त—१३३ देवता—इंद्र उभे पुनामि रोदसी ऋतेन द्रुहो दहामि सं महीरनिन्द्राः. अभिव्लग्य यत्र हता अमित्रा वैलस्थानं परि तृळ्हा अशेरन्.. (१) हे इंद्र! मैं यज्ञ द्वारा धरती और आकाश दोनों को पवित्र करता हूं एवं इंद्रद्रोहियों को आश्रय देने वाली धरती को भली-भांति जानता हूं. एकत्र हुए शत्रु हमें जहां भी मिले, वहीं मारे गए. मरे हुए वे श्मशानभूमि में इधर-उधर पड़े हैं. (१) अभिव्लग्या चिदद्रिवः शीर्षा यातुमतीनाम्. छिन्धि वट्रिणा पदा महावटूरिणा पदा.. (२) हे वैरीभक्षणकर्त्ता इंद्र! शत्रुओं की सेना का सिर अपने विस्तृत पैरों से कुचल दो. (२) अवासां मघवञ्जहि शर्धो यातुमतीनाम्. वैलस्थानके अर्मके महावैलस्थे अर्मके.. (३) हे धनस्वामी इंद्र! इन आयुधसंपन्न सेनाओं की शक्ति नष्ट करके इन्हें निंदनीय श्मशान में फेंक दो. (३) यासां तिस्रः पञ्चाशतोऽभिव्लङ्गैरपावपः. तत्सु ते मनायति तकत्सु ते मनायति.. (४) हे इंद्र! तुमने एक सौ पचास शत्रु सेनाओं का विनाश किया. लोग इस काम को बड़ा कहते हैं, पर तुम्हारे लिए यह छोटा है. (४) पिशङ्गभृष्टिमम्भृणं पिशाचिमिन्द्र सं मृण. सर्वं रक्षो नि बर्हय.. (५) हे इंद्र! पीले रंग वाले, भयंकर शब्द करने वाले पिशाचों का नाश करो एवं संपूर्ण राक्षसों को समाप्त करो. (५) अवर्मह इन्द्र दादृहि श्रुधी नः शुशोच हि द्यौः क्षा न भीषाँ अद्रिवो घृणान्न भीषाँ अद्रिवः. शुष्मिन्तमो हि शुष्मिभिर्धैरुग्रेभरीयसे. अपूरुषघ्नो अप्रतीत शूर सत्वभिस्त्रिसप्तैः शूर सत्वभिः.. (६) हे इंद्र! तुम हमारी स्तुति सुनो और महान् मेघ को अधोमुख करके उसका विदारण करो. हे मेघस्वामी इंद्र! जिस प्रकार वृष्टि के अभाव में अन्न न होने से धरती दुःखी होती है, उसी प्रकार आकाश भी शोक करता है. जैसे त्वष्टा के भय से धरती और आकाश दुःखी थे, उसी प्रकार अन्न के अभाव से होते हैं. हे इंद्र! तुम अधिक बलवान् होने के कारण शत्रु विनाश ebook converter DEMO Watermarks*