ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 397, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंवायु भार ढोने के लिए रथ के अग्रभाग में लाल रंग के घोड़े जोड़ते हैं. वे अत्यंत गमनशील एवं बोझा ढोने में समर्थ हैं. जार जिस प्रकार तंद्रा में पड़ी नारी को जगा देता है, उसी प्रकार तुम यज्ञकर्त्ता यजमान को हव्यदान के लिए सावधान कर देते हो. धरती और आकाश को प्रकाशित करके तुम हव्य प्राप्ति के लिए उषाकाल को स्थापित करते हो. (३) तुभ्यमुषासः शुचयः परावति भद्रा वस्त्रा तन्वते दंसु रश्मिषु चित्रा नव्येषु रश्मिषु. तुभ्यं धेनुः सबर्दुघा विश्वा वसूनि दोहते. अजनयो मरुतो वक्षणाभ्यो दिव आ वक्षणाभ्यः.. (४) हे वायु! उषाएं दूरवर्ती आकाश में अपनी किरणों से घरों को आच्छादित करती हुई पहले के समान कल्याणकारी वस्त्र का विस्तार करती हैं. उषाओं की किरणें नवीन हैं. तुम्हारे यज्ञ को संपन्न कराने के लिए ही गाएं अमृत बरसाती हुई अन्न देती हैं. तुमने दीप्त आकाश में मेघों को पूर्ण करके नदियों को प्रभावशील बनाया. (४) तुभ्यं शुक्रासः शुचयस्तुरण्यवो मदेषूग्रा इषणन्त भुर्वण्यपामिषन्त भुर्वणि. त्वां त्सारी दसमानो भगमीट्टे तक्ववीये. त्वं विश्वस्माद्भुवनात्पासि धर्मणासुर्यत्यासि धर्मणा.. (५) हे वायु! उज्ज्वल, पवित्र एवं तेजपूर्ण सोम तुम्हें प्रमुदित करने के निमित्त आह्वान योग्य अग्नि के समीप जाते हैं एवं जलवर्षा की अभिलाषा करते हैं. अत्यंत भयभीत एवं बलहीन यजमान यज्ञादि विघातकों को भगाने के लिए तुम्हारी स्तुति करता है. हम हविधारणरूप धर्म से युक्त हैं, इसलिए तुम सभी भयों से हमारी रक्षा करो. (५) त्वं नो वायवेषामपूर्व्यः सोमानां प्रथमः पीतिमर्हसि सुतानां पीतिमर्हसि. उतो विहुत्मतीनां विशां ववर्जुषीणाम्. विश्वा इत्ते धेनवो दुह आशिरं घृतं दुहत आशिरम्.. (६) हे वायु! तुमने सबसे पहले सोमरस पिया है. तुम्हीं सबसे पहले निचोड़े गए सोम को पीने योग्य हो. तुम पापरहित एवं यज्ञकर्त्ता यजमानों का हव्य स्वीकार करते हो. समस्त गाएं तुम्हारे निमित्त ही दूध और घी देती हैं. (६) सूक्त—१३५ देवता—वायु स्तीर्णं बर्हिरुप नो याहि वीतये सहस्रेण नियुता नियुतवते शतिनीभिर्नियुत्वते. तुभ्यं हि पूर्वपीतये देवा देवाय येमिरे. प्र ते सुतासो मधुमन्तो अस्थिरन्मदाय क्रत्वे अस्थिरन्.. (१) हे वायु! तुम नियुत नामक अश्वों पर चढ़कर उस द्रव्य को स्वीकार करने के लिए आओ ebook converter DEMO Watermarks*