ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 402, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंअस्मत्रा गन्तमुप नोऽर्वाञ्चा सोमपीतये. अयं वां मित्रावरुणा नृभिः सुतः सोम आ पीतये सुतः.. (३) अध्वर्यु तुम्हारे निमित्त पत्थर के टुकड़ों से उसी प्रकार सोमरस को निचोड़ते हैं, जिस प्रकार गाय से दूध काढ़ा जाता है. हमारी रक्षा करने वाले तुम दोनों सोमपान के लिए समीप आओ. यज्ञ संपन्न करने वाले लोगों ने यह सोम तुम्हारे पीने के लिए ठीक से निचोड़ा है. (३) सूक्त—१३८ देवता—पूषा प्रप्र पूष्णस्तुविजातस्य शस्यते महित्वमस्य तवसो न तन्दते स्तोत्रमस्य न तन्दते. अर्चामि सुम्नयन्नहमन्त्यूतिं मयोभुवम्. विश्वस्य यो मन आयुयुवे मखो देव आयुयुवे मखः.. (१) अनेक यजमानों के कल्याण के निमित्त उत्पन्न पूषादेव के बल की सभी स्तुति करते हैं. कोई भी न उनकी स्तुति को समाप्त करता है और न उनके बल का विरोध करता है. इसी कारण मैं भी सुख की इच्छा से रक्षा के लिए तत्पर, सुख के उत्पन्न करने वाले, यज्ञ के स्वामी एवं सब मनुष्यों के मन के साथ एकरूप होने वाले पूषा की स्तुति करता हूं. (१) प्र हि त्वा पूषन्नजिरं न यामनि स्तोमेभिः कृण्व ऋणवो यथा मृध उष्ट्रो न पीपरो मृधः. हुवे यत्त्वा मयोभुवं देवं सख्याय मर्त्यः. अस्माकमाङ्गूषान्युम्निनस्कृधि वाजेषु द्युम्निनस्कृधि.. (२) हे पूषा! लोग जैसे शीघ्रगामी घोड़े की प्रशंसा करते हैं, उसी प्रकार मैं यज्ञस्थल में शीघ्र आने के लिए तुम्हारी स्तुति करता हूं. तुम हमें ऊंट के समान संग्राम के पार पहुंचाते हो, इसलिए मैं युद्ध में आने के लिए तुम्हारी स्तुति करता हूं. मैं मरणधर्मा तुम्हारी मित्रता पाने के लिए सुख के उत्पादक तुम्हारा आह्वान करता हूं. हमारे आह्वान को सफल करके हमें युद्ध में विजयी बनाओ. (२) यस्य ते पूषन्त्सख्ये विपन्यवः क्रत्वा चित्सन्तोऽवसा बुभुजिर इति क्रत्वा बुभुजिरे. तामनु त्वा नवीयसीं नियुतं राय ईमहे. अहेळमान उरुशंस सरी भव वाजेवाजे सरी भव.. (३) हे पूषा! यजमान तुम्हारी मित्रता प्राप्त करके उत्तम यज्ञों द्वारा तुम्हें प्रसन्न करते हैं एवं स्तोत्र बोलते हुए तुम्हारी रक्षा प्राप्त करके भांति-भांति के सुख भोगते हैं. तुमसे नवीन रक्षण प्राप्त करने के बाद हम तुमसे नियुत धन की याचना करते हैं. हे पूषा! बहुत से लोग तुम्हारी स्तुति करते हैं. तुम हमारे प्रति दयालु बनकर आओ और युद्ध में हमारे आगे चलो. (३) अस्या ऊ षु ण उप सातये भुवोऽहेळमानो ररिवाँ अजाश्व श्रवस्यतामजाश्व. ebook converter DEMO Watermarks*