ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 405, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहमारा हो. (८) दध्यङ्ङ ह मे जनुषं पूर्वो अङ्गिराः प्रियमधः कण्वो अत्रिर्मनुर्विदुस्ते मे पूर्वे मनुर्विदुः. तेषां देवेष्वायतिरस्माकं तेषु नाभयः. तेषां पदेन मह्या नमे गिरेन्द्राग्नी आ नमे गिरा.. (९) प्राचीन दध्यङ्, अंगिरा, प्रियमध, कण्व, अत्रि एवं मनु मेरे जन्म को जानते हैं. वे एवं मनु हमारे पितरों को जानते हैं. वे महर्षियों से दीर्घकाल से संबंधित हैं एवं मेरे जीवन के साथ उनका संबंध है. उनकी महत्ता के कारण मैं स्तुति रूपी वाणी से उन्हें नमस्कार करता हूं. (९) होता यक्षद्धनिनो वन्त वार्यं बृहस्पतिर्यजति वेन उक्षभिः पुरुवारेभिरुक्षभिः. जगृभ्मा दूर आदिशं श्लोकमद्रेरध त्मना. अधारयदरिन्दानि सुक्रतुः पुरू सद्मानि सुक्रतुः.. (१०) होता यज्ञ करे एवं हव्य की कामना करने वाले देव सोमरस प्राप्त करें. इच्छा करते हुए बृहस्पति तृप्त करने वाले एवं वरणीय सोमरस से यज्ञ करते हैं. हम यजमानों ने दूर देश में उत्पन्न होने वाले एवं सोम कूटने के साधन पत्थरों की आवाज सुनी थी. यह शोभन कर्म वाला यजमान स्वयं जल एवं बहुत से निवास योग्य घरों को धारण करता है. (१०) ये देवासो दिव्येकादश स्थ पृथिव्यामध्येकादश स्थ. अप्सुक्षितो महिनैकादश स्थ ते देवासो यज्ञमिमं जुषध्वम्.. (११) स्वर्ग में जो ग्यारह देव हैं, धरती पर जो ग्यारह देव हैं एवं अंतरिक्ष में जो ग्यारह देव हैं, वे अपनी महिमा से इस यज्ञ की सेवा करें. (११) सूक्त—१४० देवता—अग्नि वेदिषदे प्रियधामाय सुद्युते धासिमिव प्र भरा योनिमग्नये. वस्त्रेणेव वासया मन्मना शुचिं ज्योतीरथं शुक्रवर्णं तमोहनम्.. (१) हे अध्वर्यु! यज्ञवेदी पर विराजने वाले, अपने स्थान को प्रेम करने वाले एवं शोभन प्रकाशयुक्त अग्नि के लिए हव्य अन्न के समान वेदीरूपी स्थान तैयार करो. उस शुद्ध, प्रकाशयुक्त, दीप्तवर्ण एवं अंधकारनाशक स्थान को सुंदर कुशों से इस प्रकार ढक दो, जिस प्रकार किसी को कपड़े से ढका जाता है. (१) अभि द्विजन्मा त्रिवृदन्नमृज्यते संवत्सरे वावृधे जग्धमी पुनः. अन्यस्यासा जिह्वया जेन्यो वृषा न्य१न्येन वनिनो मृष्ट वारणः.. (२) द्विजन्मा अग्नि, आज्य, पुरोडाश एवं सोम नामक तीन भाइयों को सामने आकर खाते ebook converter DEMO Watermarks*