भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 443, कुल 1855 में से

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ये अपने निर्माता के लिए सदा घूमती रहती हैं. (१५) स्त्रियः सतीस्ताँ उ मे पुंस आहुः पश्यदक्षण्वान्न वि चेतकन्धः. कविर्यः पुत्रः स ईमा चिकेत यस्ता विजानात्स पितुष्पितासत्.. (१६) किरणें स्त्रियां होती हुई भी पुरुष हैं. उन्हें केवल आंखों वाला ही देख सकता है, अंधा नहीं. जो क्रांतदर्शी हैं, वे ही यह बात जानते हैं. उन किरणों को जानने वाला पिता का भी पिता है. (१६) अवः परेण पर एनावरेण पदा वत्सं बिभ्रती गौरुदस्थात्. सा कद्रीची कं स्विदर्धं परागात्क्व स्वित्सूते नहि यूथे अन्तः.. (१७) गोरूप आहुति बछड़े रूपी अग्नि का पिछला भाग अपने सामने वाले पैरों से और अगला भाग अपने पिछले पैरों से पकड़कर ऊपर की ओर जाती है. वह कहां जाती है और किसके लिए बीच से ही लौट आती है? वह कहां पर बछड़े को जन्म देती है? वह अन्य गायों के समूह में तो बछड़ा पैदा करती नहीं है. (१७) अवः परेण पितरं यो अस्यानुवेद पर एनावरेण. कवीयमानः क इह प्र वोचद्देवं मनः कृतो अधि प्रजातम्.. (१८) जो आदित्यरूपी ऊपर स्थित लोकपालक की उपासना नीचे स्थित अग्नि रूपी लोकपालक के साथ तथा नीचे वाले की उपासना ऊपर वाले के साथ करते हैं, कौन लोग इस संसार में अपने को क्रांतदर्शी प्रसिद्ध करते हुए यह बात करते हैं? दिव्यमन किस से उत्पन्न होता है? (१८) ये अर्वाञ्चस्ताँ उ पराच आहुर्ये पराञ्चस्ताँ उ अर्वाच आहुः. इन्द्रश्च या चक्रथुः सोम तानि धुरा न युक्ता रजसो वहन्ति.. (१९) काल को जानने वाले अधोमुख को ऊर्ध्वमुख और ऊर्ध्वमुख को अधोमुख कहते हैं. हे सोम! इंद्र को साथ लेकर तुमने जो घूमने के गोल बनाए हैं, वे उसी प्रकार संसार का बोझा ढोते हैं, जिस प्रकार जुए में जुता हुआ घोड़ा. (१९) द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया समानं वृक्षं परि षस्वजाते. तयोरन्यः पिप्पलं स्वाद्वत्त्यनश्नन्नन्यो अभि चाकशीति.. (२०) जीवात्मा और परमात्मारूपी दो पक्षी मित्र बनकर साथ-साथ संसार रूपी वृक्ष पर रहते हैं. उन में से एक (जीवात्मा) पीपल के स्वादिष्ट फलों को खाता है. दूसरा (परमात्मा) फल न खाता हुआ केवल देखता है. (२०) यत्रा सुपर्णा अमृतस्य भागमनिमेषं विदथाभिसंवरन्ति. eBook converter DEMO Watermarks*