भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 445, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 445

हिङ्कृण्वती वसुपत्नी वसूनां वत्समिच्छन्ती मनसाभ्यागात्. दुहामश्विभ्यां पयो अघ्न्येयं सा वर्धतां महते सौभगाय.. (२७) घी, दूध आदि से सदा पालन करने वाली गाय बछड़े के लिए मन में इच्छा करती हुई रंभाती हुई आती है. वह गाय अश्विनीकुमारों को दूध दे और उनके सौभाग्य को बढ़ावें. (२७) गौरमीमेदनु वत्सं मिषन्तं मूर्धानं हिङ्ङकृणोन्मातवा उ. सृक्वाणं घर्ममभि वावशाना मिमाति मायुं पयते पयोभि:... (२८) गाय आंखें बंद किए बछड़े को देखकर रंभाती है, उसका मस्तक चाट कर शूद्ध करने के लिए रंभाती है, बछड़े के होंठों पर फेन देखकर रंभाती है तथा दूध पिलाकर उसे तृप्त करती है. (२८) अयं स शिङ्क्ते येन गौरभीवृता मिमाति मायुं ध्वसनावधि श्रिता. सा चित्तिभिर्नि हि चकार मर्त्यं विद्युद्भवन्ती प्रति वव्रिमौहत.. (२९) बछड़ा अव्यक्त शब्द करता है, जिसे सुनकर गौ आकर उससे चारों ओर से लिपट जाती है और गायों के चरने वाली धरती पर रंभाती है. गाय पशु होकर भी अपने ज्ञान से मनुष्य को हरा देती है और अत्यंत दुधारू बनकर अपना रूप दिखाती है. (२९) अनच्छये तुरगातु जीवमेजद् ध्रुवं मध्य आ पस्त्यानाम्. जीवो मृतस्य चरति स्वधाभिरमर्त्यो मर्त्येना सयोनिः.. (३०) अपने कार्यों के लिए शीघ्रगति वाला जीव सांस लेता हुआ सोता है और अपने घररूपी शरीर में निश्चिंत रूप से रहता है. मरणशील शरीर के साथ उत्पन्न शरीर का मरणरहित स्वधा के द्वारा विचरण करता है. (३०) अपश्यं गोपामनिपद्यमानमा च परा च पथिभिश्चरन्तम्. स सध्रीचीः स विषूचीर्वसान आ वरीवर्ति भुवनेष्वन्तः.. (३१) सबके रक्षक एवं कभी दुःखी न होने वाले सूर्य को मैं अंतरिक्ष में आते-जाते देखता हूं. वह सूर्य अपने साथ जाने वाली एवं पीछे हटने वाली किरणों को लपेटे हुए भुवनों के मध्य बार-बार आते-जाते हैं. (३१) य ईं चकार न सो अस्य वेद य ईं ददर्श हिरुगिन्नु तस्मात्. स मातुर्योना परिवीतो अन्तर्बहुप्रजा निर्ऋतिमा विवेश.. (३२) जो पुरुष संतान उत्पत्ति के निमित्त गर्भाधान करता है, वह भी इसका रहस्य नहीं जानता. जो माता के बढ़े हुए पेट से गर्भ को अनुमान द्वारा देखता है, वह उससे भी छिपा रहता है. वह माता की योनि के बीच स्थित रहता है और अनेक प्रजाओं का कारण बनकर ebook converter DEMO Watermarks*