भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 466, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 466

प्र ये पश्यन्नर्यमणं सचायोस्त्वया शूर्ता वहमाना अपत्यम्.. (६) हे अश्वस्वामी इंद्र! तुमने स्तोत्रों से वृद्धि प्राप्त करके ऐसे लोगों का वध किया जो दान नहीं देते थे और तुम्हारे मित्र यजमानों के शत्रु थे. जो तुम्हें आश्रयदाता के रूप में देखते एवं जो हव्य देने के लिए तुम्हारे सामने आते हैं, वे तुमसे संतान पाते हैं. (६) रपत्कविरिन्द्रार्कसातौ क्षां दासायोपबर्हणीं कः. करत्तिस्रो मघवा दानुचित्रा नि दुर्योणे कुयवाचं मृधि श्रेत्.. (७) हे इंद्र! अन्न प्राप्ति के निमित्त क्रांतदर्शी होता तुम्हारी स्तुति करता है. तुमने दास असुर का वध करके धरती को उसकी शय्या बनाया था. इंद्र ने तीन भूमियों का दानरूपी विचित्र कार्य करके दुर्योणि राजा के कल्याण के लिए कुयवाच को मारा था. (७) सना ता त इन्द्र नव्या आगुः सहो नभोऽविरणाय पूर्वीः. भिनत्पुरो न भिदो अदेवीर्ननमो वधरदेवस्य पीयोः.. (८) हे इंद्र! नवीनतम ऋषि तुम्हारे अति प्राचीन वीरकर्मों की स्तुति करते हैं. तुमने युद्ध समाप्त करने के लिए अनेक हिंसकों को समाप्त किया है. तुमने विरोधियों के देवशून्य नगरों को नष्ट किया तथा दानरहित विरोधी वृत्र के ऊपर अपना वज्र झुकाया. (८) त्वं धुनिरिन्द्र धुनिमतीर्ऋणोरपः सीरा न स्रवन्तीः. प्र यत्समुद्रमति शूर पर्षि पारया तुर्वशं यदुं स्वस्ति.. (९) हे इंद्र! तुम शत्रुओं को कंपित करने वाले हो, इसलिए बहती हुई सीरा नदी के समान तरंगों वाला जल धरती पर बहाते हो. हे शूर! तुमने सागर को जल से पूर्ण करते समय यदु और तुर्वसु राजाओं का पालन करके उनका कल्याण किया. (९) त्वमस्माकमिन्द्र विश्वध स्या अवृकतमो नरां नृपाता. स नो विश्वासां स्पृधां सहोदा विद्यामेषं वृजनं जीरदानुम्.. (१०) हे इंद्र! तुम सदा हमारे उत्तम रक्षक एवं मनुष्यों के रक्षक बनो, तुम हमारी सेना को बल प्रदान करो. हम अन्न, धन और दीर्घ आयु प्राप्त करें. (१०) सूक्त—१७५ देवता—इंद्र मत्स्यपायि ते महः पात्रस्येव हरिवो मत्सरो मदः. वृषा ते वृष्ण इन्दुवाजी सहस्रसातमः.. (१) हे अश्वस्वामी इंद्र! महान् एवं पूज्य सोमरस जिस प्रकार पात्र में रखा है, उसी प्रकार तुम भी इसे स्वीकार करो. तुम इसे पीकर प्रसन्नता प्राप्त करोगे. हे कामवर्षी इंद्र! यह सोम तुम्हारी