भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 480, कुल 1855 में से

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दधाते ये अमृतं सुप्रतीके द्यावा रक्षतं पृथिवी नो अभ्वात्.. (६) धरती और आकाश विस्तृत, निवास करने योग्य, महान् एवं शस्य आदि को उत्पन्न करने वाले हैं. मैं देवों की प्रसन्नता के लिए इन्हें यज्ञ में बुलाता हूं. ये विचित्र रूप वाले एवं जल धारणकर्त्ता हैं. हे धरती और आकाश! हमें पाप से बचाओ. (६) उर्वी पृथ्‍वी बहुले दूरेअन्ते उप ब्रुवे नमसा यज्ञे अस्मिन्. दधाते ये सुभगे सुप्रतूर्ती द्यावा रक्षतं पृथिवी नो अभ्वात्.. (७) मैं इस यज्ञ में नमस्कार संबंधी मंत्रों द्वारा विस्तृत, महान्, अनेक आकारों वाले तथा अंतहीन धरती और आकाश की स्तुति करता हूं. हे सौभाग्यसंपन्न एवं सुखपूर्वक तरने वाले धरती और आकाश! हमें पाप से बचाओ. (७) देवान्वा यच्चकृमा कच्चिदागः सखायं वा सदमिज्जास्पतिं वा. इयं धीर्भूया अवयानमेषां द्यावा रक्षतं पृथिवी नो अभ्वात्.. (८) हे धरती और आकाश! हम देवों, बंधुओं एवं जमाता के प्रति नित्य जो अपराध करते हैं, हमारे उन अपराधों को दूर करो. तुम हमें पाप से बचाओ. (८) उभा शंसा नर्या मामविष्ठामुभे मामूती अवसा सचेताम्. भूरि चिदर्यः सुदास्तरायेषा मदन्त इषयेम देवाः.. (९) स्तुति के योग्य एवं मानवों के हितकारी धरती और आकाश के प्रति की गई स्तुतियां मेरी रक्षा करें. उक्त दोनों रक्षक मेरी रक्षा के लिए मिलें. हे देवो! तुम्हारे स्तुतिकर्त्ता हम हव्य अन्न द्वारा तुम्हें संतुष्ट करते हैं एवं दान करने के लिए अन्न की अभिलाषा करते हैं. (९) ऋतं दिवे तदवोचं पृथिव्या अभिश्रावाय प्रथमं सुमेधाः. पातामवद्याद्दुरितादभीके पिता माता च रक्षतामवोभिः.. (१०) मुझ बुद्धिमान् ने धरती और आकाश के प्रति ऐसी स्तुतियां की हैं, जो चारों दिशाओं में प्रकाशित हैं. धरती और आकाश रूपी माता-पिता मुझे निंदा-योग्य पाप से बचावें एवं अपने समीप रखकर मनचाही वस्तुओं से मेरा पालन करें. (१०) इदं द्यावापृथिवी सत्यमस्तु पितर्मातर्यदिहोपब्रुवे वाम्. भूतं देवानाभवमे अवोभिर्विद्यामेषं वृजनं जीरदानुम्.. (११) हे माता और पितारूपी धरती और आकाश! इस यज्ञ में मेरे द्वारा की गई स्तुतियों को सार्थक करो. तुम रक्षा साधनों द्वारा हम स्तुतिकर्त्ताओं के पास आओ, जिससे हम अन्न, बल और दीर्घ आयु प्राप्त करें. (११) ebook converter DEMO Watermarks*