भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 499, कुल 1855 में से

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अन्नदाता, उन्नत गुणों वाला, वीर तथा देवों को चाहने वाला पुत्र जन्म ले. वह हमें कुल की रक्षा करने वाली संतान दे एवं हमारा अन्न देवों के पास जाए. (९) वनस्पतिरवसृजन्नुप स्थादग्निर्हविः सूदयति प्र धीभिः. त्रिधा समक्तं नयतु प्रजानन्देवेभ्यो दैव्यः शमितोप हव्यम्.. (१०) हमारे कर्मों को जानने वाले वनस्पति रूप अग्नि समीप उपस्थित हैं. वे विशेष प्रकार के कर्मों से हव्य को ठीक से पकाते हैं. शमिता नामक दिव्य अग्नि हव्य को तीन प्रकार से भली- भांति शुद्ध जानकर देवों के समीप ले जावें. (१०) घृतं मिमिक्षे घृतमस्य योनिर्घृते श्रितो घृतम्वस्य धाम. अनुष्वधमा वह मादयस्व स्वाहाकृतं वृषभ वक्षि हव्यम्.. (११) मैं अग्नि की जन्मभूमि, वासस्थल एवं आश्रयदाता काष्ठ को अग्नि में डालता हूं. हे कामवर्षी अग्नि! हव्य देने के समय देवों को बुलाकर प्रसन्न करो तथा स्वाहा के रूप में डाला गया हव्य धारण करो. (११) सूक्त—४ देवता—अग्नि हुवे वः सुद्योत्मानं सुवृक्तिं विशामग्निमतिथिं सुप्रयसम्. मित्रइव यो दिधिषाय्यो भूद्देव आदेवे जने जातवेदाः.. (१) हे यजमानो! मैं तुम्हारे कल्याण के निमित्त अत्यंत तेजस्वी, पापरहित, यजमानों के अतिथि एवं शोभन हवि वाले अग्नि को बुलाता हूं. जातवेद अग्नि मनुष्यों से लेकर देवों तक सब प्राणियों को मित्र के समान धारण करते हैं. (१) इमं विधन्तो अपां सधस्थे द्वितादधुर्भृगवो विश्वा३योः. एष विश्वान्यभ्यस्तु भूमा देवानाम्ग्निररतिर्जीराश्वः.. (२) अग्नि की सेवा करने वाले भृगुओं ने अग्नि को जल के निवासस्थान अंतरिक्ष में एवं मानवों की संतान के बीच धारण किया. शीघ्रगामी अश्वों वाले एवं देवों के ईश्वर अग्नि हमारे सभी शत्रुओं को हरावें. (२) अग्निं देवासो मानुषीषु विक्षु प्रियं धुः क्षेष्यन्तो न मित्रम्. स दीदयदुशतीरूर्य्या आ दक्षाय्यो यो दास्वते दम आ.. (३) देवों ने स्वर्ग को जाते समय अपने प्रिय अग्नि को मनुष्यों के बीच मित्र के रूप में स्थित किया था. वे अग्नि हव्यदाता यजमान के घर में देवों द्वारा स्थापित होकर उसके कल्याण के लिए अपनी प्रिय रातों में प्रकाशयुक्त होते रहते हैं. (३) ebook converter DEMO Watermarks*