ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 555, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंइड़ा, सरस्वती एवं भारती नामक तीन दिव्य नेत्रियां व्यथारहित अपांनपात् के लिए अन्न धारण करती हैं एवं जल में उत्पन्न सोम को बढ़ाती हैं. अपांनपात् सर्वप्रथम उत्पन्न जलों के अमृत सोम को पीते हैं. (५) अश्वस्यात्र जनिमास्य च स्वर्दुहो रिषः सम्पृचः पाहि सूरीन्. आमासु पूर्षु परो अप्रमृष्यं नारातयो वि नशन्नानृतानि.. (६) अपांनपात् रूप सागर से उच्चैःश्रवा अश्व एवं इस संसार का जन्म हुआ है. वह अपहर्ता हिंसक के संपर्क से स्तोता की रक्षा करते हैं. दान न करने वाले झूठे लोग अपरिपक्व जल में रहते हुए भी इस अधृष्य देव को नहीं पा सकते. (६) स्व आ दमे सुदुघा यस्य धेनुः स्वधां पीपाय सुभ्वन्नमत्ति. सो अपां नपादूर्जयन्नप्स्व१न्तर्वसुदेयाय विधते वि भाति.. (७) अपांनपात् अपने घर में निवास करते हैं. उनकी गाएं सुख से दुही जा सकती हैं. वह वर्षा का जल बढ़ाते हैं एवं उससे उत्पन्न अन्न का भक्षण करते हैं. वह जल के बीच में शक्तिशाली बनकर यजमान को धन देने के लिए प्रकाशित होते हैं. (७) यो अप्सवा शुचिना दैव्येन ऋतावाजस्र उर्विया विभाति. वया इदन्या भुवनान्यस्य प्र जायन्ते वीरुधश्च प्रजाभिः.. (८) जो अपांनपात् सत्ययुक्त, सदा एक रूप, विस्तीर्ण एवं जल के मध्य पवित्र देवतेज से सुशोभित हैं, सब भुवन उन्हीं की शाखाएं हैं एवं फलफलों से युक्त वनस्पतियां उन्हीं से उत्पन्न हुई हैं. (८) अपां नपादा ह्यस्थादुपस्थं जिह्मानामूर्ध्वो विद्युतं वसानः. तस्य ज्येष्ठं महिमानं वहन्तीर्हिरण्यवर्णाः परि यन्ति यह्वीः.. (९) अपांनपात् कुटिलगति जलों के बीच स्वयं ऊपर उठकर जलते हुए एवं तेजस्वी बादल धारण करते हुए आकाश में स्थित होते हैं. सुनहरे रंग की नदियां उनके महत्त्व को सब जगह फैलाती हुई बहती हैं. (९) हिरण्यरूपः स हिरण्यसन्दृगपां नपात्सेदु हिरण्यवर्णः. हिरण्ययात्परि योनेर्निषद्या हिरण्यदा ददत्यन्नमस्मै.. (१०) हिरण्यरूप, हिरण्यमय इंद्रियों वाले एवं हिरण्यवर्ण अपांनपात् हिरण्यमय स्थान पर बैठकर सुशोभित होते हैं. हिरण्यदाता यजमान उन्हें दान देते हैं. (१०) तदस्यानीकमुत चारु नामापीच्यं वर्धते नप्तुरपाम्. यमिन्धते युवतयः समित्था हिरण्यवर्णं घृतमन्नमस्य.. (११) ebook converter DEMO Watermarks*