ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 558, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंमन्दस्व होत्रादनु जोषमन्धसोऽध्वर्यवः स पूर्णां वष्ट्यासिचम्. तस्मां एतं भरत तद्हशो ददिर्होत्रासोमं द्रविणोदः पिब ऋतुभिः.. (१) हे द्रविणोदा अर्थात् धनप्रिय अग्नि! होता द्वारा किए हुए यज्ञ में अन्न ग्रहण करके प्रसन्न एवं तृप्त बनो. हे अध्वर्युगण! वे पूर्ण आहुति चाहते हैं. इसलिए उन्हें यह सोम दो. सोम के इच्छुक वे द्रविणोदा वांछित फल देते हैं. हे द्रविणोदा! होता के यज्ञ में ऋतुओं के साथ सोमपान करो. (१) यमु पूर्वमहुवे तमिदं हुवे सेदु हव्यो ददिर्यो नाम पत्यते. अध्वर्युभिः प्रस्थितं सोम्यं मधु पोत्रात्सोमं द्रविणोदः पिब ऋतुभिः.. (२) हे द्रविणोदा! हम प्राचीन काल में जिन्हें बुलाते थे, उन्हीं को इस समय भी बुलाते हैं. वे ही बुलाने योग्य, दाता एवं सबके स्वामी हैं. अध्वर्युगण द्वारा तैयार किया गया सोमरूप मधु पोता के यज्ञ में ऋतुओं के साथ पिओ. (२) मेद्यन्तु ते वह्नयो येभिरीयसेऽरिषण्यन्वीळयस्वा वनस्पते. आयूया धृष्णो अभिगूर्या त्वं नेष्ट्रात्सोमं द्रविणोदः पिब ऋतुभिः.. (३) हे द्रविणोदा! वे घोड़े तृप्त हों, जिनके द्वारा तुम आते हो. हे वनों के स्वामी! तुम किसी की हिंसा न करते हुए दृढ़ बनो. हे शत्रुपराभवकारी! तुम नेष्टा के यज्ञ में आकर ऋतुओं के साथ सोम पिओ. (३) अपाद्धोत्रादुत पोत्रादमत्तोत नेष्ट्रादजुषत प्रयो हितम्. तुरीयं पात्रममृक्तममर्त्यं द्रविणोदाः पिबतु द्राविणोदसः.. (४) जिन द्रविणोदा ने याग के होता से सोम पिआ है, वे पोता से प्रसन्न हुए हैं एवं जिन्होंने नेष्टा के यज्ञ में दिया हुआ अन्न खाया है, वे ही द्रविणोदा हव्यदाता ऋत्विज् के मृत्यु निवारक चौथे सोमपात्र को पिएं. (४) अर्वाञ्चमद्य यय्यं नृवाहणं रथं युञ्जाथामिह वां विमोचनम्. पृङ्क्तं हवींषि मधुना हि कं गतमथा सोमं पिबतं वाजिनीवसू.. (५) हे अश्विनीकुमारो! अपने वेगशाली, तुम्हें ढोने वाले एवं इस यज्ञ में पहुंचाने वाले रथ को इस यज्ञ में भली प्रकार जोड़ो, हमारा हव्य मधुयुक्त करो एवं यहां आओ. हे अन्नस्वामियो! हमारा सोमरस पिओ. (५) जोष्यग्ने समिधं जोष्याहुतिं जोषि ब्रह्म जन्यं जोषि सुष्टुतिम्. विश्वेभिर्विश्वॉ ऋतुना वसो मह उशनद्देवाँ उशतः पायया हविः.. (६) हे अग्नि! तुम समिधाओं, आहुतियों, जनकल्याणकारी मंत्रों तथा शोभन स्तुतियों से ebook converter DEMO Watermarks*