ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 561, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंजो धन स्तोताओं की संतान को सुख देने वाला है, वही मुझ बहुत स्तुति करने वाले को प्रदान करो. (११) सूक्त—३९ देवता—अश्विनीकुमार ग्रावाणेव तदिदर्थं जरेथे गृध्रेव वृक्षं निधिमन्तमच्छ. ब्रह्माणेव विदथ उक्थशासा दूतेव हव्या जन्या पुरुत्रा.. (१) हे अश्विनीकुमारो! तुम फेंके हुए पत्थर के समान शत्रु को बाधा पहुंचाओ. जिस प्रकार पक्षी फल वाले वृक्ष पर जाते हैं, उसी प्रकार तुम धन वाले यजमान के पास जाओ. तुम मंत्र उच्चारण करने वाले ब्रह्मा एवं जनपद में राजा द्वारा भेजे गए दूतों के समान अनेक लोगों द्वारा बुलाने योग्य हो. (१) प्रातर्यावाणा रथ्येव वीराजेव यमा वरमा सचेथे. मेने इव तन्वा३ शुम्भमाने दम्पतीव क्रतुविदा जनेषु.. (२) हे अश्विनीकुमारो! प्रातःकाल यज्ञ के लिए जाने वाले रथ-स्वामियों के समान वीर, छागों के समान यमल, नारियों के समान शोभन-शरीर, पति-पत्नी के समान साथ रहने वाले एवं सबके यज्ञकर्मों के ज्ञाता तुम दोनों सेवक के पास आओ. (२) शृङ्गेव नः प्रथमा गन्तमर्वाक् छफाविव जर्भुराणा तरोभिः. चक्रवाकेव प्रति वस्तोरुस्रार्वाञ्चा यातं रथ्येव शक्रा.. (३) हे अश्विनीकुमारो! तुम पशुओं के सींगों के समान सभी देवों में प्रमुख हो. घोड़े के खुरों के समान वेग से चलते हुए तुम दोनों हमारे सामने आओ. हे शत्रुनाशक एवं अपने कर्म में समर्थ अश्विनीकुमारो! तुम चकवा-चकवी अथवा दो रथ स्वामियों के समान हमारे पास आओ. (३) नावेव नः पारयतं युगेव नभ्येव न उपधीव प्रधीव. श्वानेव नो अरिषण्या तनूनां खृगलेव विस्रसः पातमस्मान्.. (४) हे अश्विनीकुमारो! नाव जिस प्रकार लोगों को नदी के पार उतार देती है, उसी प्रकार तुम हमें दुःखों से पार पहुंचाओ. जुआ, पहिए की नाभि, अरे और पुठी जिस प्रकार रथ को पार करते हैं, उसी प्रकार तुम हमें पार लगाओ. तुम कुत्तों की तरह हमें शरीरनाश एवं कवच के समान बुढ़ापे से बचाओ. (४) वातेवाजुर्या नद्येव रीतिरक्षी इव चक्षुषा यातमर्वाक्. हस्ताविव तन्वे३शम्भविष्ठा पादेव नो नयतं वस्यो अच्छ.. (५) ebook converter DEMO Watermarks*