भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 562, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 562

हे वायु के समान नाशरहित, नदियों के समान शीघ्रगामी एवं नेत्रों के समान दर्शक अश्विनीकुमारो! हमारे सामने आओ. तुम हाथपैरों के समान हमारे शरीर को सुख देने वाले होकर हमें उत्तम धन की ओर प्रेरित करो. (५) ओष्ठाविव मध्वास्ये वदन्ता स्तनाविव पिप्यतं जीवसे नः. नासेव नस्तन्वो रक्षितारा कर्णाविव सुश्रुता भूतमस्मे.. (६) हे अश्विनीकुमारो! तुम दोनों होंठों के समान मधुर वचन बोलो, दो स्तनों के समान हमारी जीवन रक्षा के लिए दूध पिलाओ, नासिका के दोनों छिद्रों के समान हमारे शरीर-रक्षक बनो एवं कानों के समान हमारी बात सुनो. (६) हस्तेव शक्तिमभि सन्ददी नः क्षामेव नः समजतं रजांसि. इमा गिरो अश्विना युष्मयन्तीः क्ष्णोत्रेणेव स्वधितिं सं शिशीतम्.. (७) हे अश्विनीकुमारो! हाथों के समान हमें सामर्थ्य दो एवं धरती-आकाश के समान जल प्रदान करो. हमारे द्वारा की गई स्तुतियां तुम्हारे समीप जाती हैं. सान जिस प्रकार तलवार को तेज कर देती है, उसी प्रकार तुम हमारी स्तुतियों को तीक्ष्ण बनाओ. (७) एतानि वामश्विना वर्धनानि ब्रह्म स्तोमं गृत्समदासो अक्रन्. तानि नरा जुजुषाणोप यातं बृहद्वदेम विदथे सुवीराः.. (८) हे अश्विनीकुमारो! गृत्समद ऋषि ने ये मंत्र तथा स्तोत्र तुम्हारी उन्नति के लिए रचे हैं. हे नेताओ! तुम उन्हें चाहते हुए आओ. हम शोभन पुत्र-पौत्र प्राप्त करके इस यज्ञ में बहुत सी स्तुतियां बोलेंगे. (८) सूक्त ४० देवता—सोम व पूषा सोमापूषणा जनना रयीणां जनना दिवो जनना पृथिव्याः. जातौ विश्वस्य भुवनस्य गोपौ देवा अकृण्वन्नमृतस्य नाभिम्.. (१) हे सोम एवं पूषा! तुम धन, स्वर्ग एवं धरती के जनक हो. तुम उत्पन्न होते ही संपूर्ण भुवन के रक्षक बने. देवों ने तुम्हें अमरता का केंद्रबिंदु बनाया. (१) इमौ देवौ जायमानौ जुषन्तेमौ तमांसि गूहतामजुष्टा. आभ्यामिन्द्रः पक्वमामास्वन्तः सोमापूषभ्यां जनदुस्रियासु.. (२) सब देवों ने सोम एवं पूषादेव के जन्म लेते ही उनकी सेवा की. ये दोनों असेव्य अंधकार का नाश करते हैं. इंद्र इनके साथ मिलकर गायों के थन में दूध उत्पन्न करते हैं. (२) सोमापूषणा रजसो विमानं सप्तचक्रं रथमविश्वमिन्वम्. ebook converter DEMO Watermarks*

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित) · पृष्ठ 562, कुल 1855 में से · BharatKosha