ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 566, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंआ वामुपस्थमद्रुहा देवाः सीदन्तु यज्ञियाः. इहाद्य सोमपीतये.. (२१) हे शत्रुरहित धरती और आकाश! यज्ञ योग्य देवता आज सोमपान के लिए तुम्हारे पास बैठें. (२१) सूक्त—४२ देवता—कपिंजलरूपी इंद्र कनिक्रदज्जनुषं प्रब्रुवाण इयर्ति वाचमरितेव नावम्. सुमङ्गलश्च शकुने भवासि मा त्वा का चिदभिभा विश्व्या विदत्.. (१) बार-बार बोलकर भविष्य की बात बताता हुआ कपिंजल वाणी को उसी प्रकार प्रेरित करता है, जिस प्रकार मल्लाह नाव को आगे बढ़ाता है. हे पक्षी! तुम अति कल्याणकारी बनो. किसी भी प्रकार पराजय सभी दिशाओं से तुम्हारे समीप न आवे. (१) मा त्वा श्येन उद्धीन्मा सुपर्णो मा त्वा विददिषुमान्वीरो अस्ता. पित्र्यामनु प्रदिशं कनिक्रदत्सुमङ्गलो भद्रवादी वदेह.. (२) हे शकुनि! बाज अथवा गरुड़ तुम्हें न मारे. धनुर्धारी एवं बाण फेंकने वाला वीर भी तुम्हें प्राप्त न करे. दक्षिण दिशा में बार-बार बोलते हुए एवं मंगलकारक बनकर हमारे लिए प्यारी बात कहो. (२) अव क्रन्द दक्षिणतो गृहाणां सुमङ्गलो भद्रवादी शकुन्ते. मा नः स्तेन ईशत माघशंसो बृहद्वदेम विदथे सुवीराः.. (३) हे कपिंजल पक्षी! तुम कल्याणसूचक एवं प्रियवादी बनकर हमारे घरों की दक्षिण दिशा में बोलो. चोर एवं पाप की बात कहने वाले लोग हम पर अधिकार न करें. हम शोभन पुत्र- पौत्र प्राप्त करके इस यज्ञ में बहुत सी स्तुतियां बोलेंगे. (३) सूक्त—४३ देवता—कपिंजलरूपी इंद्र प्रदाक्षिणिदभि गृणन्ति कारवो वयो वदन्त ऋतुथा शकुन्तयः. उभे वाचौ वदति सामगा इव गायत्रं च त्रैष्टुभं चानु राजति.. (१) कपिंजल पक्षी समय-समय पर अन्न की सूचना देते हुए स्तोता के समान प्रदक्षिणा करते हुए शब्द करें. सामगायन करने वाला जिस प्रकार गायत्री एवं त्रिष्टुप् दोनों छंदों को बोलता है, उसी प्रकार कपिंजल पक्षी भी दोनों प्रकार के वाक्य बोलकर सुनने वालों को प्रसन्न करता है. (१) उद्गातेव शकुने साम गायसि ब्रह्मपुत्र इव सवनेषु शंससि. ebook converter DEMO Watermarks*