भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 567, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 567

वृषेव वाजी शिशुमतीरपीत्या सर्वतो नः शकुने भद्रमा वद विश्वतो नः शकुने पुण्यमा वद.. (२) हे पक्षी! तुम सामगान करने वाले उद्गाता की तरह गाओ एवं यज्ञ में ब्रह्मपुत्र ऋत्विक् के समान शब्द करो. गर्भाधान करने में समर्थ घोड़ा घोड़ी के पास जाकर जिस प्रकार हिनहिनाता है, तुम भी उसी प्रकार का शब्द करो. तुम हमारे लिए सभी जगह कल्याणकारी एवं पुण्यकारी शब्द बोलो. (२) आवदंस्त्वं शकुने भद्रमा वद तूष्णीमासीनः सुमतिं चिकिद्धि नः. यदुत्पतन्वदसि कर्करिर्यथा बृहद्वदेम विदथे सुवीराः.. (३) हे कपिंजल पक्षी! तुम शब्द करते समय हमारे लिए कल्याण की सूचना दो एवं मौन रहते समय हमारे प्रति सुमति की इच्छा करो. तुम उड़ते समय कर्करी बाजे के समान शब्द करते हो. हम शोभन पुत्र-पौत्र प्राप्त करके इस यज्ञ में बहुत सी स्तुतियां बोलेंगे. (३)