भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 568, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 568

तृतीय मंडल सूक्त—१ देवता—अग्नि सोमस्य मा तवसं वक्ष्यग्ने वहिं चकर्थ विदथे यजध्यै. देवाँ अच्छा दीद्यद्युञ्जे अद्रिं शमाये अग्ने तन्वं जुषस्व.. (१) हे अग्नि! यज्ञ करने के निमित्त तुमने मुझे सोमरस का वाहक बनाया है, इसलिए मुझे शक्तिशाली बनाने की इच्छा करो. प्रकाशयुक्त होता हुआ मैं देवों को लक्ष्य करके सोमरस निचोड़ने के लिए पत्थर उठाता हूं एवं स्तोत्र बोलता हूं. तुम मेरे शरीर की रक्षा करो. (१) प्राञ्चं यज्ञं चकृम वर्धतां गीः समिद्भिरग्निं नमसा दुवस्यन्. दिवः शशासुर्विदथा कवीनां गृत्साय चित्तवसे गातुमीषुः.. (२) हे अग्नि! तुमने पूर्वकाल में यज्ञ किया है. हमारे स्तुति वचनों की वृद्धि हो. मेरे आत्मीय लोग समिधाओं एवं हव्य द्वारा अग्नि की सेवा करें. देवों ने स्वर्ग से आकर स्तोताओं को ज्ञान दिया है. वे स्तुति की हुई एवं प्रज्वलित अग्नि की स्तुति करना चाहते हैं. (२) मयो दधे मेधिरः पूतदक्षो दिवः सुबन्धुर्जनुषा पृथिव्याः. अविन्दन्नु दर्शतमप्स्व१न्तर्देवासो अग्निमपसि स्वसॄणाम्.. (३) मेधावी, शुद्धबलयुक्त, जन्म से ही उत्तम बंधु, स्वर्ग का सुख विधान करने वाले एवं सुंदर अग्नि को हमने बहने वाली नदियों के जल के भीतर से यज्ञकार्य के हेतु प्राप्त किया है. (३) अवध॑यन्त्सुभगं सप्त यह्वीः श्वेतं जज्ञानमरुषं महित्वा. शिशुं न जातमभ्यारुरश्वा देवासो अग्निं जनिमन्वपुष्यन्.. (४) शोभन धन वाले, उज्ज्वल एवं महत्त्व से प्रकाशित जल में स्थित अग्नि को सात नदियों ने बढ़ाया. घोड़ी जिस प्रकार तुरंत जन्मे बछड़े के पास जाती है, उसी प्रकार नदियां उत्पन्न अग्नि के समीप गईं. देवों ने अग्नि को उत्पन्न होते ही प्रकाशमान किया. (४) शुक्रेभिरङ्गै रज आततन्वान् क्रतुं पुनानः कविभिः पवित्रैः. शोचिर्वसानः पर्यायुरपां श्रियो मिमीते बृहतीरनूनाः.. (५) ebook converter DEMO Watermarks*

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