भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 569, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 569

अग्नि उज्ज्वल तेजों के द्वारा अंतरिक्ष को व्याप्त करते हुए यजमान को स्तुति योग्य एवं पवित्र तेजों से शुद्ध करते हैं तथा दीप्ति को धारण करके यजमान को धन एवं सारी संपत्तियां देते हैं. (५) वव्राजा सीमनदतीरदब्धा दिवो यह्वीरवसाना अनग्नाः. सना अत्र युवतयः सयोनीरेकं गर्भं दधिरे सप्त वाणीः.. (६) जल का भक्षण न करते हुए एवं जल के द्वारा नष्ट होते हुए अंतरिक्ष की संतान के समान एवं वस्त्र ढके न होने पर भी जल से घिरे होने के कारण अग्नि नंगे नहीं हैं. सनातन, नित्य तरुण एवं एक स्थान से उत्पन्न सात नदियों ने अग्नि को गर्भ के समान धारण किया. (६) स्तीर्णं अस्य संहतो विश्वरूपा घृतस्य योनौ स्रवथे मधूनाम्. अस्थुरत्र धेनवः पिन्वमाना मही दस्मस्य मातरा समीची.. (७) अनेक रूप वाली एवं सब जगह फैली हुई अग्नि की किरणें जलवर्षा के पश्चात् जल के उत्पत्ति स्थान आकाश में एकत्रित रहती हैं. सबको प्रसन्न करने वाली जलरूपी गाएं इसी अग्नि में रहती हैं. विशाल धरती और आकाश सुंदर अग्नि के माता-पिता हैं. (७) बभ्राणः सूनो सहसो व्यद्यौद्दधानः शुक्रा रभसा वपूंषि. श्चोतन्ति धारा मधुनो घृतस्य वृषा यत्र वावृधे काव्येन.. (८) हे बल के पुत्र अग्नि! तुम सबके द्वारा धारण किए जाकर भास्कर एवं वेग वाली किरणें धारण करते हुए प्रकाशित होते हो. अग्नि जिस समय स्तोत्र के कारण बढ़ते हैं, उस समय मीठे जल की धाराएं गिरती हैं. (८) पितुश्चिद्गुधर्जनुषा विवेद व्यस्य धारा असृजद्वि धेनाः. गुहा चरन्तं सखिभिः शिवेभिर्दिवो यह्वीभिर्न गुहा बभूव.. (९) जन्म लेते ही अग्नि ने अपने पिता अंतरिक्ष के स्तनों में स्थित जल को जान लिया. वहां से जलधाराओं को बहाया एवं मध्यमा वाणियों को विसर्जित किया. अपने कल्याणकारी वायुरूपी बंधुओं के साथ स्थित होकर आकाश के संतानरूपी जलों के साथ गुफा में रहने वाली अग्नि को कोई प्राप्त नहीं कर सका. (९) पितुश्च गर्भं जनितुश्च बभ्रे पूर्वीरिको अधयत्पीप्यानाः. वृष्णे सपत्नी शुचये सबन्धू उभे अस्मै मनुष्ये३ नि पाहि.. (१०) अग्नि अपने पिता अंतरिक्ष का गर्भ अर्थात् जल एवं अपने जन्मदाता ब्राह्मण का गर्भ अर्थात् लोकपोषण धारण करते हैं. अकेले अग्नि अनेक रूप में वृद्धि प्राप्त ओषधियों का भक्षण करते हैं. परस्पर सौत एवं मनुष्यों का कल्याण करने वाले धरती-आकाश कामवर्षक ebook converter DEMO Watermarks*

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