ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 577, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंआ देव देवान्यजथाय वक्षि सखा सखीन्त्सुमना यक्ष्यग्ने.. (१) हे अत्यधिक प्रज्वलित अग्नि! तुम उत्तम मन से जागो. तुम अपने इधर-उधर फैलने वाले तेज के द्वारा हमें धन देने की कृपा करो. हे अतिशय द्योतमान अग्नि! देवों को हमारे यज्ञ में लाओ. तुम देवों के मित्र हो. अनुकूलतापूर्वक देवों का यज्ञ करो. (१) यं देवासस्रिरहन्नायजन्ते दिवेदिवे वरुणो मित्रो अग्नि:. सेमं यज्ञं मधुमन्तं कृधी नस्तनूनपादघृतयोनिं विधन्तम्.. (२) वरुण, मित्र और अग्नि के जिस शरीर को पवित्र करने वाले अग्नि का प्रत्येक दिन में तीन बार यज्ञ करते हैं, वे हमारे इस जल निमित्तक यज्ञ को वर्षा आदि फलों से युक्त करें. (२) प्र दीधितिर्विश्ववारा जिगाति होतारमीळः प्रथमं यजध्यै. अच्छा नमोभिर्वृषभं वन्दध्यै स देवान्यक्षदिषितो यजीयान्.. (३) सब लोगों को प्रिय लगने वाली स्तुति देवों को बुलाने वाले अग्नि के समीप जावे. इडा देवों में प्रमुख, सामने आकर कामना पूर्ण करने वाले एवं वंदना के योग्य अग्नि के पास उन्हें हव्य अन्नों से प्रसन्न करने के लिए आवें. यज्ञकर्म में अत्यंत कुशल अग्नि हमारी प्रेरणा से यज्ञ करें. (३) ऊर्ध्वो वां गातुरध्वरे अकार्यूर्ध्वा शोचींषि प्रस्थिता रजांसि. दिवो वा नाभा न्यसादि होता स्तृणीमहि देवव्यचा वि बर्हि:.. (४) अग्नि और कुश के लिए यज्ञ में एक उत्तम मार्ग बनाया गया है. दीप्ति वाला हव्य ऊपर जाता है. होता दीप्तियुक्त यज्ञशाला के बीच में बैठा है. हम देवों से व्याप्त कुश बिछाते हैं. (४) सप्त होत्राणि मनसा वृणाना इन्वन्तो विश्वं प्रति यन्नृतेन. नृपेशसो विदथेषु प्र जाता अभी३मं यज्ञं वि चरन्त पूर्वी:.. (५) मन से प्रार्थना करने योग्य एवं जल के द्वारा विश्व को सींचते हुए देवगण सात यज्ञों में जाते हैं. वे नेता रूप, यज्ञों में उत्पन्न, यज्ञ के दोनों द्वार-तुल्य देवता हमारे इस यज्ञ में शरीरसहित आवें. (५) आ भन्दमाने उषसा उपाके उत स्मयेते तन्वा३ विरूपे. यथा नो मित्रो वरुणो जुजोषदिन्द्रो मरुत्वाँ उत वा महोभि:.. (६) भली प्रकार स्तुत रात व दिन परस्पर मिलकर या अलग-अलग होकर प्रकाश रूपी शरीर से आवें. वे धरती और आकाश को उस तेज से युक्त करें, जिससे मित्र, वरुण एवं इंद्र हम पर कृपा करते हैं. (६) ebook converter DEMO Watermarks*