ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 596, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंआ देवेषु यतत आ सुवीर्य आ शंस उत नृणाम्.. (४) समस्त विश्व के कर्त्ता अग्नि विश्व में निवास करते हैं, द्रव्य को ढोते हुए देवों के समीप ले जाते हैं. स्तोताओं के सामने आते हैं, यज्ञकर्त्ताओं के स्तोत्र सुनने आते हैं तथा युद्ध में मानवों की रक्षा करते हैं. (४) मा नो अग्नेऽमतये मावीरतायै रीरधः. मागोतायै सहसस्पुत्र मा निदेऽप द्वेषांस्या कृधि.. (५) हे बल के पुत्र अग्नि! हमें शत्रुरूप दरिद्रता, कायरता, पशुहीनता एवं निंदा के योग्य मत करना. हमारे प्रति द्वेष की भावना समाप्त करो. (५) शग्धि वाजस्य सुभग प्रजावतोऽग्ने बृहतो अध्वरे. सं राया भूयसा सृज मयोभुना तुविद्युम्न यशस्वता.. (६) हे शोभन धन के स्वामी अग्नि! तुम यज्ञ में महान् एवं संतानयुक्त धन के स्वामी हो. हे बहुधनसंपन्न अग्नि! हमें अधिक मात्रा वाला, सुखकारक एवं कीर्तिदाता धन प्रदान करो. (६) सूक्त—१७ देवता—अग्नि समिध्यमानः प्रथमानु धर्मा समक्तुभिरज्यते विश्ववारः. शोचिष्केशो घृतनिर्णिक्पावकः सुयज्ञो अग्निर्यजथाय देवान्.. (१) यज्ञ संबंधी कर्मों के धारक, ज्वालाारूपी केश वाले, सबके स्वीकार्य, पवित्र करने वाले एवं शोभन यज्ञों से युक्त अग्नि यज्ञ के प्रारंभ में क्रमशः जलते हैं एवं देवयज्ञ करने के लिए घी से सींचे जाते हैं. (१) यथायजो होत्रमग्ने पृथिव्या यथा दिवो जातवेदश्चिकित्वान्. एवानेन हविषा यक्षि देवान् मनुष्वद्यज्ञं प्र तिरेममद्य.. (२) हे जातवेद एवं सर्वज्ञ अग्नि! तुमने जिस प्रकार यजमानरूप पृथ्वी का हवि स्वीकार किया, जिस प्रकार आकाश देवता का द्रव्य स्वीकार किया, उसी प्रकार हमारे यज्ञ में होता बनकर देवों को उनका भाग प्रदान करो. तुम मनु के यज्ञ के समान हमारा यज्ञ आज पूरा करो. (२) त्रीण्यायूंषि तवं जातवेदस्तिस्र आजानीरुषसस्ते अग्ने. ताभिर्देवानांमवो यक्षि विद्वानथा भव यजमानाय शं योः.. (३) हे जातवेद अग्नि! तुम्हारा अन्न तीन प्रकार का है तथा तीन प्रकार की उषाएं तुम्हारी माता हैं. तुम उनके साथ मिलकर देवों को हव्य दो. हे विद्वान् अग्नि! तुम यजमान के सुख ebook converter DEMO Watermarks*