ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 623, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्र सिन्धुमच्छा बृहती मनीषावस्युरह्वे कुशिकस्य सूनुः.. (५) विश्वामित्र बोले—"हे जलपूर्ण सरिताओ! मेरा सोम तैयार करने संबंधी वचन सुनकर थोड़ी देर के लिए रुक जाओ. कुशिक का पुत्र मैं महान् स्तुति द्वारा अपनी रक्षा की इच्छा करता हुआ सरिता को विशेष रूप से बुलाता हूं." (५) इन्द्रो अस्माँ अरदद्वज्रबाहुरपाहन्वृत्रं परिधिं नदीनाम्. देवोऽनयत्सविता सुपाणिस्तस्य वयं प्रसवे याम उर्वीः.. (६) नदियों ने उत्तर दिया—"हाथ में वज्रधारण करने वाले इंद्र ने नदियों को रोकने वाले वृत्र को मारकर हम दोनों नदियों को खोदा था. समस्त विश्व के प्रेरक, शोभन हाथ वाले एवं तेजस्वी इंद्र ने हमें सागर की ओर बहाया है. उसी की आज्ञा मानती हुई हम जल से भरकर बहती हैं." (६) प्रवाच्यं शश्वधा वीर्यं१न्तदिन्द्रस्य कर्म यदहिं विवृश्चत्. वि वज्रेण परिषदो जघानायन्नापोऽयनमिच्छमानाः.. (७) “इंद्र ने अहि राक्षस को मारा था. उसके इस वीर कर्म को सदा कहना चाहिए. इंद्र ने चारों ओर बैठे हुए बाधाकारक असुरों को वज्र से मारा था. इसके बाद गमन का अभिलाषी जल बरसा.” (७) एतद्वचो जरितर्मापि मृष्ठा आ यत्ते घोषानुत्तरा युगानि. उक्थेषु कारो प्रति जुषस्व मा नो नि कः पुरुषत्रा नमस्ते.. (८) “हे स्तोता! हमारा तुम्हारा जो संवाद हुआ है, इसे मत भूलना. भविष्य में होने वाले यज्ञों में स्तुति रचना करके तुम हमारी सेवा करो. हमें पुरुष के समान प्रगल्भ मत बनाओ. हम तुम्हें नमस्कार करती हैं.” (८) ओ षु स्वसारः कारवे शृणोत ययौ वो दूरादनसा रथेन. नि षू नमध्वं भवता सुपारा अधोअक्षाः सिन्धवः स्रोत्याभिः.. (९) विश्वामित्र ने उत्तर दिया—"हे बहिन के समान नदियो! मुझ स्तुतिकर्त्ता के वचनों को सुनो. मैं बैलगाड़ी और रथ की सहायता से दूर देश से तुम्हारे पास आया हूं. तुम नीची एवं सरलता से पार करने योग्य बन जाओ. हे नदियो! तुम मेरे रथ के पहिए के निचले भाग को छूती हुई बहो." (९) आ ते कारो शृणवामा वचांसि ययाथ दूरादनसा रथेन. नि ते नंसै पीप्यानेव योषा मर्यायेव कन्या शश्वचै ते.. (१०) नदियां बोलीं—"हे स्तोता! हमने तुम्हारी बातें सुनीं. इस बैलगाड़ी एवं रथ से साथ गमन ebook converter DEMO Watermarks*