भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 627, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 627

उपो नयस्व वृषणा तपुष्पोतेमव त्वं वृषभ स्वधावः. ग्रसेतामश्वा वि मुचेह शोणा दिवेदिवे सदृशीरद्धि धानाः.. (३) हे कामवर्षक एवं अन्न के स्वामी इंद्र! अपने सेचन समर्थ एवं शत्रुओं से रक्षा करने वाले दोनों घोड़ों को हमारे पास ले आओ एवं इस यजमान की रक्षा करो. लाल रंग वाले उन घोड़ों को यहां यज्ञ में छोड़ दो. वे घास खाएं. तुम प्रतिदिन भुने हुए जौ खाओ. (३) ब्रह्मणा ते ब्रह्मयुजा युनज्मि हरी सखाया सधमाद आशू. स्थिरं रथं सुखमिन्द्राधितिष्ठन्प्रजानन्विद्वाँ उप याहि सोमम्.. (४) हे इंद्र! मंत्र द्वारा रथ में जोड़ने योग्य, युद्ध में समान रूप से प्रसिद्ध तुम्हारे दोनों घोड़ों को हम मंत्रोच्चारणपूर्वक रथ में जोड़ते हैं. तुम ज्ञानपूर्वक मजबूत एवं सुखदायक रथ पर चढ़कर सोम के समीप आओ. (४) मा ते हरी वृषणा वीतपृष्ठा नि रीरमन्यजमानासो अन्ये. अत्यायाहि शश्वतो वयं तेऽरं सुतेभिः कृणवाम सोमैः.. (५) हे इंद्र! अभिलाषाएं पूर्ण करने वाले एवं सुंदर पीठ वाले तुम्हारे हरि नामक घोड़ों को अन्य यजमान प्रसन्न न करें. हम निचोड़े हुए सोम द्वारा तुम्हें पूरी तरह तृप्त करेंगे. तुम बहुत से यजमानों को छोड़कर आओ. (५) तवायं सोमस्त्वमेह्यर्वाङ् शश्वत्तमं सुमना अस्य पाहि. अस्मिन्यज्ञे बर्हिष्या निषद्या दधिष्वेमं जठर इन्दुमिन्द्र.. (६) यह सोम तुम्हारा है. तुम इसके सामने आओ एवं प्रसन्न मन से इस बहुत से सोम को पिओ. हे इंद्र! इस यज्ञ में बिछे हुए कुशों पर बैठकर इस सोम को पेट में डालो. (६) स्तीर्णं ते बर्हिः सुत इन्द्र सोमः कृता धाना अत्तवे ते हरिभ्याम्. तदोकसे पुरुशाकाय वृष्णे मरुत्वते तुभ्यं राता हवींषि.. (७) हे इंद्र! तुम्हारे बैठने के लिए कुश बिछाए गए हैं, तुम्हारे पीने के लिए सोम निचोड़ा गया है एवं तुम्हारे घोड़ों के खाने के लिए भुने हुए जौ तैयार हैं. कुशों के आसन वाले, अनेक लोगों द्वारा स्तुत, कामवर्षक एवं मरुतों की सेना वाले तुम्हारे लिए विस्तृत हव्य दिए गए हैं. (७) इमं नरः पर्वतास्तुभ्यमापः समिन्द्र गोभिर्मधुमन्तमक्रन्. तस्यागत्या सुमना ऋष्व पाहि प्रजानन्विद्वान्पथ्या३ अनु स्वाः.. (८) हे इंद्र! अध्वर्यु आदि ने पत्थरों एवं जल की सहायता से तुम्हारे लिए दुग्ध मिश्रित मीठे सोम को तैयार किया है. हे दर्शनीय शोभन मन वाले एवं विद्वान् इंद्र! अपनी सुंदर स्तुतियों को जानते हुए सोम पिओ. (८) ebook converter DEMO Watermarks*