भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 633, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 633

जो यजमान कामवर्षी इंद्र के निमित्त गौ नाम वाली धेनु से हव्य दूध दुहते हैं, वे स्वर्ग प्राप्त करके कवि बनते हैं. असुरों का नया बल धारण करके उन मायावियों ने अपना-अपना रूप इंद्र को अर्पित किया. (७) तदिन्वस्य सवितुर्नकिर्मे हिरण्ययीममतिं याममतिं यामशिश्रेत्. आ सुष्टुती रोदसी विश्वमिन्वे अपीव योषा जनिमानि वव्रे.. (८) समस्त विश्व के निर्माता इंद्र की सुवर्णमयी दीप्ति को कोई सीमित नहीं कर सकता. इस स्तुति के आश्रय इंद्र इस शोभन स्तुति से प्रसन्न होकर सबको तृप्त करने वाले धरती-आकाश का इस प्रकार आलिंगन करते हैं, जिस तरह माता अपने बच्चे को छाती से लगाती है. (८) युवं प्रत्नस्य साधथो महो यद्दैवी स्वस्तिः परि णः स्यातम्. गोपाजिह्वस्य तस्थुषो विरूपा विश्वे पश्यन्ति मायिनः कृतानि.. (९) हे इंद्र एवं वरुण! तुम दोनों स्तोता का कल्याण करो, उसे दैवी कल्याण दो तथा हमारी सभी प्रकार रक्षा करो. सभी डरे हुए देवों को अभय वाणी सुनाने वाले व स्थिरतर इंद्र नाना रूप कर्मों को देखते हैं. (९) शुनं हुवेम मघवानमिन्द्रमस्मिन्भरे नृतमं वाजसातौ. शृण्वन्तमुग्रमूतये समत्सु घ्नन्तं वृत्राणि सञ्जितं धनानाम्.. (१०) धन प्राप्ति वाले संग्राम में उत्साहपूर्ण, धनवान्, सकल विश्व के नेता, स्तुतियां सुनने वाले, शत्रुओं को भयंकर, युद्ध में राक्षसविनाशकारी एवं शत्रुओं के धन के विजेता इंद्र को हम रक्षा के लिए बुलाते हैं. (१०) सूक्त—३९ देवता—इंद्र इन्द्रं मतिर्हृद आ वच्यमानाच्छा पतिं स्तोमतष्टा जिगाति. या जागृविर्विदथे शस्यमानेन्द्र यत्ते जायते विद्धि तस्य.. (१) हे जगत् के स्वामी इंद्र! हृदय से उद्भूत एवं स्तोताओं द्वारा निर्मित स्तुतियां तुम्हारे पास जावें. यज्ञ में मेरी स्तुति तुम्हारे जागरण का कारण बनती है, उसे जानो. (१) दिवश्चिदा पूर्व्या जायमाना वि जागृविर्विदथे शस्यमाना. भद्रा वस्त्राण्यर्जुना वसाना सेयमस्मे सनजा पित्र्या धीः.. (२) हे इंद्र! सूर्योदय से भी पहले यज्ञ में की गई स्तुति तुम्हारा जागरण करती हुई कल्याणकारिणी, शुक्लवस्त्रधारिणी, सनातन एवं हमारे पितरों के पास से आई है. (२) यमा चिदत्र यमसूरसूत जिह्वाया अग्रं पतदा ह्यस्थात्.