भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 632, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 632

लोगों को देखना चाहता हूं जो पूर्वकाल में किए गए यज्ञों के कारण स्वर्ग पा गए हैं. (१) इनोत पृच्छ जनिमा कवीनां मनोधृतः सुकृतस्तक्षत द्याम्. इमा उ ते प्रण्यो३ वर्धमाना मनोवाता अध नु धर्मणि ग्मन्.. (२) हे इंद्र! सुकृत कर्मों द्वारा व भूमि को पाने वालों के जन्म के विषय में गुरुओं से पूछो. वे मन के समय एवं शुभ कर्मों की सहायता से स्वर्ग को प्राप्त हुए हैं. इस यज्ञ में तुम्हें लक्ष्य करके कही गई स्तुतियां मन की गति के समान बढ़ रही हैं. (२) नि षीमिदत्र गुह्या दधाना उत क्षत्राय रोदसी समञ्जन्. सं मात्राभिर्ममिरे येमुरुर्वी अन्तर्मही समृते धायसे धुः.. (३) इस भूलोक में सर्वत्र गूढ़ कर्म करने वाले कवियों ने बल पाने के लिए धरती एवं आकाश को सुशोभित किया है. उन्होंने धरती एवं आकाश की सीमा निश्चित की है. परस्पर संगत, विस्तीर्ण एवं महान् धरती-आकाश को मध्यवर्ती अंतरिक्ष द्वारा धारण किया है. (३) आतिष्ठन्तं परि विश्वे अभूषञ्छ्रियो वसानश्चरति स्वरोचिः. महत्तद्वृष्णो असुरस्य नामा विश्वरूपो अमृतानि तस्थौ.. (४) समस्त कवियों ने रथ में बैठे हुए इंद्र को सभी प्रकार से अलंकृत किया है. अपनी प्रभा से प्रकाशित इंद्र दीप्ति से ढके हुए स्थित हैं. कामवर्षी एवं प्राणवान् इंद्र के कर्म विचित्र हैं, क्योंकि उन्होंने नाना रूप धारण करके जलों का आश्रय लिया है. (४) असूत् पूर्वो वृषभो ज्यायानिमा अस्य शुरुधः सन्ति पूर्वीः. दिवो नपाता विदथस्य धीभिः क्षत्रं राजाना प्रदिवो दधाथे.. (५) कामवर्षी, चिरंतन एवं सर्वश्रेष्ठ इंद्र ने प्यास को रोकने वाले एवं प्रभूत जल को बनाया था. स्वर्ग के स्वामी एवं पवित्र करने वाले इंद्र एवं वरुण तेजस्वी यज्ञकर्त्ता की स्तुतियों के कारण प्रसन्न होकर धन धारण करते हैं. (५) त्रीणि राजाना विदथे पुरूणि परि विश्वानि भूषथः सदांसि. अपश्यमत्र मनसा जगन्वान्द्रते गन्धर्वां अपि वायुकेशान्.. (६) हे तेजस्वी इंद्र एवं वरुण! इस यज्ञ में विस्तृत एवं सोमरस आदि से पूर्ण तीन सवनों को भली-भांति अलंकृत करो. हे इंद्र! मैंने यज्ञ में वायु के कारण बिखरे हुए बालों वाले गंधर्वों को देखा था. इससे सिद्ध है कि तुम यज्ञ में गए थे. (६) तदिन्वस्य वृषभस्य धेनोरा नामभिर्ममिरे सख्यं गोः. अन्यदन्यदसुर्यं१ वसाना नि मायिनो ममिरे रूपमस्मिन्.. (७) ebook converter DEMO Watermarks*