भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 641, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 641

आ मन्द्रैरिन्द्र हरिभिर्याहि मयूररोमभिः. मा त्वा के चिन्न यमन्विं न पाशिनोऽति धन्वेव ताँ इहि.. (१) हे इंद्र! मद करने वाले एवं मयूरों के समान रोमों वाले घोड़ों के साथ तुम इस यज्ञ में आओ. पाशबंधक जिस प्रकार पक्षी को फांस लेता है, उसी प्रकार तुम्हें कोई प्रतिबंधित न करे. तुम मरुस्थल को पार करने वाले पथिकों के समान उन्हें पार करके यज्ञ में आओ. (१) वृत्रखादो वलंरुजः पुरां दर्भो अपामजः. स्थाता रथस्य हर्योरभिश्वर इन्द्रो दृळ्हा चिदारुजः... (२) हे वृत्रहंता, मेघ-विदारक, जलों को प्रेरित करने वाले, शत्रुनगरों के विमर्दक एवं बलवान् शत्रुओं को भी नष्ट करने वाले इंद्र! दोनों घोड़ों को हांकने के लिए हमारे सामने रथ पर बैठो. (२) गम्भीराँ उदधीरिव क्रतुं पुष्यसि गा इव. प्र सुगोपा यवसं धेनवो यथा ह्रदं कुल्या इवाशत.. (३) हे इंद्र! तुम गहरे सागरों को जैसे जल से भरते हो एवं कुशल ग्वाले जैसे जौ आदि से गायों को पुष्ट बनाते हैं, उसी प्रकार इस यजमान को भी पुष्ट करो. जैसे गाएं जौ को प्राप्त करती हैं अथवा नालियां बड़े तालाब में पहुंचती हैं, उसी प्रकार सोम तुम्हें प्राप्त होते हैं. (३) आ नस्तुजं रयिं भरांशं न प्रतिजानते. वृक्षं पक्वं फलमङ्कीव धूनूहीन्द्र सम्पारणं वसु.. (४) हे इंद्र! पिता जिस प्रकार समझदार पुत्र को अपनी संपत्ति का एक भाग दे देता है, उसी प्रकार हमें शत्रुपराभवकारी पुत्र दो. जैसे पके फल तोड़ने के लिए अंकुश पेड़ को कंपा देता है, उसी प्रकार तुम हमें अभिलाषा पूर्ण करने वाला धन दो. (४) स्वयुरिन्द्र स्वराळसि स्मदिष्टिः स्वयशस्तरः. स वावृधान ओजसा पुरुष्टुत भवा नः सुश्रवस्तमः... (५) हे इंद्र! तुम धनवान्, स्वर्ग के राजा, भले वाक्य बोलने वाले एवं महान् कीर्तिशाली हो. हे बहुतों द्वारा स्तुति किए गए इंद्र! तुम अपनी शक्ति से बढ़ते हुए हमारे अतिशयशोभन अन्न वाले बनो. (५) सूक्त—४६ देवता—इंद्र युध्मस्य ते वृषभस्य स्वराज उग्रस्य यूनः स्थविरस्य घृष्वेः. अजूर्यतो वज्रिणो वीर्या३णीन्द्र श्रुतस्य महतो महानि.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*

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