ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 660, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंमाता च यत्र दुहिता च धेनू सबर्दुघे धापयेते समीची. ऋतस्य ते सदसीळे अन्तर्महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (१२) माता धरती और पुत्री द्यौ अंतरिक्ष में दूध देने वाली गायों के समान मिलकर एकदूसरी को अपना रस पिलाती हैं. जल के स्थान अंतरिक्ष के मध्य स्थित धरती-आकाश की मैं स्तुति करता हूं. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (१२) अन्यस्या वत्सं रिहती मिमाय कया भुवा नि दधे धेनूरूधः. ऋतस्य सा पयसापिन्वतेळा महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (१३) धरती के पुत्र अग्नि को जल धारारूपी जिह्वा से चाटती हुई द्यौ बादल के गर्जन के रूप में शब्द करती है. द्यौ रूपी गाय धरती को जलहीन बनाकर अपने मेघ रूप स्तनों को जल से भरती है. सूखी धरती सूर्य के जल से भीगती है. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (१३) पद्या वस्ते पुरुरूपा वपूंष्यूर्ध्वा तस्थौ त्र्यविं रेरिहाणा. ऋतस्य सद्म वि चरामि विद्वान्महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (१४) धरती बहुत से स्थावर-जंगम रूपों से अपने को ढकती है एवं उन्नत होकर तीन लोकों को व्याप्त करने वाले सूर्य को चाटती हुई ठहरती है. मैं आदित्य के स्थान को जानता हुआ उनकी सेवा करता हूं. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (१४) पदे इव निहिते दस्मे अन्तस्तयोरन्यद् गुह्यमाविरन्यत्. सध्रीचीना पथ्या३ सा विषूची महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (१५) शोभन दिवारात्रि धरती-आकाश के मध्य रखे हुए दो चरणों के समान जान पड़ते हैं. इनमें से रात्रि रूपी चरण गूढ़ एवं दूसरा दिवस रूपी चरण स्पष्ट है. इनके मिलन मार्ग अर्थात् काल को पुण्यात्मा एवं पापात्मा दोनों ही प्राप्त करते हैं. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (१५) आ धेनवो धुनयन्तामशिश्वीः सबर्दुघाः शशया अप्रदुग्धाः. नव्यानव्या युवतयो भवन्तीर्महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (१६) वर्षा द्वारा सबको प्रसन्न करने वाली, शिशुरहिता, आकाश में वर्तमान, रसहीन न होने वाली, जल रूप दूध देने वाली, परस्पर मिलित एवं अत्यंत नवीन दिशाएं कांपती रहें. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (१६) यदन्यासु वृषभो रोरवीति सो अन्यस्मिन्यूथे नि दधाति रेतः. स हि क्षपावान्त्स भगः स राजा महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (१७) जल बरसाने वाले बादल रूपी इंद्र अन्य दिशाओं में बार-बार गर्जन करते हैं एवं अन्य दिशा में जल की वर्षा करते हैं. वह जल फेंकने वाले, सबके सेवनीय एवं राजा हैं. देवों का ebook converter DEMO Watermarks*