भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 659, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 659

शयुः परस्तादध नु द्विमाताऽबन्धनश्चरति वत्स एकः. मित्रस्य ता वरुणस्य व्रतानि महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (६) धरती-आकाशरूपी माता-पिता के पुत्र सूर्य छिपते समय पश्चिम दिशा में सोते हैं. उदयकाल में वे ही सूर्य बन्धनरहित होकर आकाश में चलते हैं. यह सारा काम मित्र और वरुण का है. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (६) द्विमाता होता विदथेषु सम्राळन्वग्रं चरति क्षेति बुध्नः. प्र रण्वानि रण्यवाचो भरन्ते महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (७) दो लोकों के बनाने वाले, यज्ञ के होता एवं यज्ञ में भली-भांति सुशोभित अग्नि सूर्यरूप से, आकाश में घूमते हैं एवं सभी कर्मों के मूलकारण बनकर धरती पर रहते हैं. मधुर वाणी वाले स्तोता उनके लिए मधुर स्तोत्र बोलते हैं. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (७) शूरस्येव युध्यतो अन्तमस्य प्रतीचीनं ददृशे विश्वमायत्. अन्तर्मतिश्चरति निष्षिधं गोर्महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (८) समीप में वर्तमान अग्नि के सामने आने वाले सभी प्राणी इस प्रकार पीछे भागते हैं, जैसे युद्ध करने वाले शूर के सामने से कायर लोग भागते हैं. सबके द्वारा जाने गए अग्नि जल का नाश करने वाली ज्वाला अपने भीतर धारण करते हैं. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (८) नि वेवेति पलितो दूत आस्वन्तर्महांश्चरति रोचनेन. वपूंषि बिभ्रदभि नो वि चष्टे महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (९) सबके पालनकर्त्ता एवं देवों के दूत अग्नि इन ओषधियों में आवश्यक रूप से वर्तमान हैं एवं सूर्य के साथ-साथ धरती-आकाश के बीच में चलते हैं. नाना रूप धारण करने वाले वह अग्नि हम यज्ञकर्त्ताओं को विशेष कृपादृष्टि से देखते हैं. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (९) विष्णुर्गोपाः परमं पाति पाथः प्रिया धामान्यमृता दधानः. अग्निष्टा विश्वा भुवनानि वेद महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (१०) व्याप्त, रक्षक, प्रिय एवं क्षयरहित तेज धारण करने वाले अग्नि परम स्थान की रक्षा करते हैं. अग्नि उन सब भुवनों को जानते हैं. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (१०) नाना चक्राते यम्या३ वपूंषि तयोरन्यद्रोचते कृष्णमन्यत्. श्यावी च यदरुषी च स्वसारौ महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (११) रात और दिन का जोड़ा नाना प्रकार के रूप धारण करता है. इन दो बहिनों में एक काले रंग की है और दूसरी शुक्ल वर्ण होने के कारण दीप्त होती है. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (११) ebook converter DEMO Watermarks*