भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 658, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 658

सूक्त—५५ देवता—विश्वेदेव, अग्नि आदि उषसः पूर्वा अध यद्व्यूषुर्महद्द्वि जज्ञे अक्षरं पदे गोः. व्रता देवानामुप नु प्रभूषन्महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (१) पूर्ववर्तिनी उषा जब समाप्त होती है, तब अविनाशी सूर्य नामक महान् ज्योति आकाश अथवा सागर से उत्पन्न होती है. इसके बाद देव-संबंधी कर्म आरंभ हो जाते हैं एवं यजमान देवों के समीप उपस्थित होते हैं. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (१) मो षू णो अत्र जुहुरन्त देवा मा पूर्वे अग्ने पितरः पदज्ञाः. पुराण्योः सद्मनोः केतुरन्तर्महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (२) हे अग्नि! इस समय देवगण एवं कर्मानुसार देवपद पाने वाले पुरातन पितर हमारे कर्म में बाधा न डालें. पुरातन धरती-आकाश के मध्य उदित एवं यज्ञ का संकेत करने वाले सूर्य हमारी हिंसा न करें. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (२) वि मे पुरुत्रा पतयन्ति कामाः शम्यच्छा दीद्ये पूर्व्याणि. समिद्धे अग्नावृतमिद्वदेम महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (३) हे अग्नि! मेरी अनेक अभिलाषाएं इधर-उधर जाती हैं. अग्निष्टोम आदि के बहाने हम पुरानी स्तुतियां प्रकाशित करते हैं. यज्ञ के निमित्त अग्नि के प्रज्वलित होने पर हम सत्य बोलेंगे. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (३) समानो राजा विभृतः पुरुत्रा शये शयासु प्रयुतो वनानु. अन्या वत्सं भरति क्षेति माता महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (४) दीप्यमान एक ही अग्नि यज्ञ के निमित्त अनेक स्थानों पर व्यवहार में लाए जाते हैं. वे वेदी पर सोते हैं एवं काष्ठों से बनी अरणि में विभक्त होकर निवास करते हैं. इनके धरती- आकाशरूपी माता-पिता में से एक इन्हें उत्पन्न होते ही भरण करता है एवं दूसरी माता केवल धारण करती है. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (४) आक्षित्पूर्वास्वपरा अनूरुत्सद्यो जातासु तरुणीष्वन्तः. अन्तर्वतीः सुवते अप्रवीता महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (५) अग्नि सूखे प्राचीन वृक्षों में वर्तमान हैं, नए वृक्षों में उत्पत्ति क्रम से रहते हैं तथा इसी समय उत्पन्न पल्लवित वनस्पतियों में अंतर्भूत होते हैं, ओषधियां किसी अन्य के गर्भाधान के बिना केवल अग्नि के संसर्ग से गर्भवती होकर पुष्प, फल आदि को जन्म देती हैं. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (५) ebook converter DEMO Watermarks*

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