भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 667, कुल 1855 में से

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योग्य हैं। वे स्तुति करने वालों के प्रति प्रसन्न होते हैं। उन अत्यंत स्तुति योग्य मित्र के निमित्त अग्नि में हव्य डालो। (५) मित्रस्य चर्षणीधृतोऽवो देवस्य सानसि. द्युम्नं चित्रश्रवस्तमम्.. (६) वर्षा द्वारा मनुष्यों का पालन करने वाले मित्र का अन्न सबके द्वारा भोगयोग्य एवं उनका धन अतिशय कीर्तियुक्त है. (६) अभि यो महिना दिवं मित्रो बभूव सप्रथा:. अभि श्रवोभिः पृथिवीम्.. (७) जिस मित्र ने अपनी महिमा से अंतरिक्ष को हरा दिया है, उसी कीर्तिशाली ने धरती को अन्न से भली प्रकार पूर्ण किया है. (७) मित्राय पञ्च येमिरे जना अभिष्टिशवसे. स देवान्विश्वान्बिभर्ति.. (८) ब्राह्मण आदि पांच जन शत्रुओं को हराने वाले बल से युक्त मित्र के लिए हवि देते हैं. वे मित्र सभी देवों को धारण करते हैं. (८) मित्रो देवेष्वायुषु जनाय वृक्तबर्हिषे. इष इष्टव्रता अकः.. (९) दिव्य गुण वाले मनुष्यों में जो व्यक्ति कुश छेदन करता है, उसे मित्र देव कल्याणकारी अन्न देते हैं. (९) सूक्त—६० देवता—ऋभुगण इहेह वो मनसा बन्धुता नर उशिजो जग्मुरभि तानि वेदसा. याभिर्मायाभिः प्रतिजूतिवपर्सः सौधन्वना यज्ञियं भागमानश.. (१) हे ऋभुओ! तुम्हारे कर्मों को सब लोग मन से जानते हैं. हे नेताओ एवं सुधन्वा के पुत्रो! तुम अपने ज्ञान से उन कर्मों को जान लेते हो, जिन कर्मों द्वारा तुम शत्रु को हराने वाला तेज पाने के लिए यज्ञ के भाग की अभिलाषा करते हो. (१) याभिः शचीभिश्चमसाँ अपिंशत यया धिया गामरिणीत चर्मणः. येन हरी मनसा निरतक्षत तेन देवत्वमृभवः समानश.. (२) हे ऋभुओ! जिस शक्ति द्वारा तुमने चमस के चार भाग किए थे, जिस बुद्धि से तुमने गाय को चर्मयुक्त किया था एवं जिस ज्ञान से तुमने इंद्र के हरि नामक घोड़ों को बनाया, उन्हीं कर्मों द्वारा तुमने देवत्व पाया है. (२) इन्द्रस्य सख्यमृभवः समानशुर्मनोर्नपातो अपसो दधन्विरे. ebook converter DEMO Watermarks*