ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 698, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसूक्त—१३ देवता—अग्नि प्रत्यग्निरुषसामग्रमख्यद्विभातीनां सुमना रत्नधेयम्. यातमश्विना सुकृतो दुरोणमुत्सूर्यो ज्योतिषा देव एति.. (१) शोभन मन वाले अग्नि अंधकार-विनाशिनी उषा का मनोहर प्रकाश फैलने के समय से पहले ही बढ़ने लगते हैं. हे अश्विनीकुमारो! तुम यजमान के घर जाओ. सूर्य देव प्रकाश के साथ आ रहे हैं. (१) ऊर्ध्वं भानुं सविता देवो अश्रेद्दृप्सं दविध्वद्गविषो न सत्वा. अनु व्रतं वरुणो यन्ति मित्रो यत्सूर्यं दिव्यारोहयन्ति.. (२) सविता देव ऊपर जाने वाली किरणों का सहारा लेते हैं. किरणें जब सूर्य को आकाश पर चढ़ाती हैं, तब वरुण, मित्र एवं अन्य देव अपने कर्म इस प्रकार प्रारंभ करते हैं, जैसे धूल उड़ाता हुआ बैल गायों के पीछे चलता है. (२) यं सीमकृण्वन्तमसे विपूचे ध्रुवक्षेमा अनवस्यन्तो अर्थम्. तं सूर्यं हरितः सप्त यह्वीः स्पशं विश्वस्य जगतो वहन्ति.. (३) सृष्टि करने वाले देवों ने संसार का कार्य न त्याग कर अंधकार को सभी प्रकार से दूर करने के निमित्त जिस सूर्य को बनाया, हरि नामक सात महान् घोड़े समस्त प्राणियों को जानने वाले उस सूर्य को ढोते हैं. (३) वहिष्ठेभिर्विहरन्यासि तन्तुमवव्ययन्नसितं देव वस्म. दविध्वतो रश्मयः सूर्यस्य चर्मेवावाधुस्तमो अप्स्व१न्तः.. (४) हे सूर्य देव! तुम विश्व का निर्वाह करने वाला रस ग्रहण करने के लिए अपनी किरणें फैलाते हुए एवं काले रंग की रात को नष्ट करते हुए अपने अत्यंत वेगवान् घोड़ों के सहारे चलते हो. सूर्य की कांपती हुई किरणें आकाश के मध्य चमड़े के समान फैले हुए अंधकार को नष्ट करती हैं. (४) अनायतो अनिबद्धः कथायं न्यङ्ङुत्तानोऽव पद्यते न. कया याति स्वधया को ददर्श दिवः स्कम्भः समृतः पाति नाकम्.. (५) पास में रहने वाले, बंधनरहित एवं अधोमुख सूर्य को कोई बाधा नहीं पहुंचा सकता. ऊर्ध्वमुख सूर्य किस शक्ति से चलते हैं? आकाश में खंभे के समान सूर्य स्वर्ग का पालन करते हैं, इसे किसने देखा है? (५) सूक्त—१४ देवता—अग्नि आदि