भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 699, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 699

प्रत्यग्निरुषसो जातवेदा अख्यद्देवो रोचमाना महोभिः. आ नासत्योरुगाया रथेनेमं यज्ञमुप नो यातमच्छ.. (१) जातवेद अग्नि देव तेजों से दीप्त उषा को लक्ष्य करके बढ़ते हैं. हे परम गतिशील अश्विनीकुमारो! तुम रथ द्वारा हमारे यज्ञ के सामने आओ. (१) ऊर्ध्वं केतुं सविता देवो अश्रेज्ज्योतिर्विश्वस्मै भुवनाय कृण्वन्. आप्रा द्यावापृथिवी अन्तरिक्षं वि सूर्यो रश्मिभिश्चिकितानः.. (२) सारे संसार के लिए प्रकाश देते हुए सविता देव ऊर्ध्वमुखी किरणों का सहारा लेते हैं. सूर्य ने सबको विशेष रूप से देखते हुए किरणों से धरती, आकाश और अंतरिक्ष को प्राप्त किया है. (२) आवहन्त्यरुणीर्ज्योतिषागान्माही चित्रा रश्मिभिश्चेकिताना. प्रबोधयन्ती सुविताय देव्यु१षा ईयते सुयुजा रथेन.. (३) धनों को धारण करने वाली, लाल रंग युक्त, तेजधारिणी, महान्, किरणों के कारण रंग- बिरंगी एवं जानने वाली उषा आई थीं. उषादेवी सोए हुए प्राणियों को जगाती हुई भली प्रकार जोते गए रथ द्वारा सुख पाने के लिए आती हैं. (३) आ वां वहिष्ठा इह ते वहन्तु रथा अश्वास उषसो व्युष्टौ. इमे हि वां मधुपैयाय सोमा अस्मिन्यज्ञे वृषणा मादयेथाम्.. (४) हे अश्विनीकुमारो! उषाकाल होने पर अधिक बोझा ढोने वाले एवं गतिशील घोड़े तुम्हें इस यज्ञ में सब ओर से लावें. हे कामवर्षियो! यह सोमरस तुम्हारे पीने के लिए है. यज्ञ में सोमपान से प्रसन्न बनो. (४) अनायतो अनिबद्धः कथायं न्यङ्ङुत्तानोऽव पद्यते न. कया याति स्वधया को ददर्श दिवः स्कम्भः समृतः पाति नाकम्.. (५) पास में रहने वाले, बंधनरहित एवं ऊर्ध्वमुख-सूर्य को कोई बाधा नहीं पहुंचा सकता. ऊर्ध्वमुख-सूर्य किस शक्ति से चलते हैं? आकाश के खंभे के समान सूर्य स्वर्ग का पालन करते हैं, इसे किसने देखा है? (५) सूक्त—१५ देवता—अग्नि, सोम आदि अग्निहोता नो अध्वरे वाजी सन्परि णीयते. देवो देवेषु यज्ञियः.. (१) देवों को बुलाने वाले, इंद्रादि देवों के मध्य तेजस्वी एवं यज्ञ के योग्य अग्नि शीघ्रगामी अश्व के समान हमारे यज्ञ में चारों ओर से लाए जाते हैं. (१) ebook converter DEMO Watermarks*