ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 701, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसूक्त—१६ देवता—इंद्र आ सत्यो यातु मघवाँ ऋजीषी द्रवन्त्वस्य हरय उप नः. तस्मा इदन्धः सुषुमा सुदुक्षमिहाभिपित्वं करते गृणानः.. (१) सोम एवं सत्य को धारण करने वाले इंद्र हमारे पास आवें. उनके घोड़े हमारी ओर दौड़ें. हम यजमान उन इंद्र के लिए इस यज्ञ में सारयुक्त सोम निचोड़ रहे हैं. हमारे द्वारा स्तुत इंद्र हमारी इच्छा पूरी करें. (१) अव स्य शूराध्वनो नान्तेऽस्मिन्नो अद्य सवने मन्दध्यै. शंसात्युक्थमुशनेव वेधाश्चिकितुषे असुर्याय मन्म.. (२) हे शूर इंद्र! जैसे मार्ग समाप्त होने पर लोग घोड़े को छोड़ देते हैं, उसी प्रकार माध्यंदिन सवन के समय तुम हमें छुटकारा दे दो, जिससे हम तुम्हें प्रसन्न कर सकें. हे सर्वज्ञ एवं असुरविनाशक इंद्र! हम यजमान उशना के समान तुम्हारे प्रति सुंदर स्तुति बोलते हैं. (२) कविर्न निण्यं विदथानि साधन्व्दृषा यत्सेकं विपिपानो अर्चात्. दिव इत्था जीजनत्सप्त कारूनह्ना चिच्चक्रुर्वयुना गृणन्तः.. (३) कवि के समान गूढ़ कार्यों का साधन करते हुए कामवर्षी इंद्र जब सोमरस को अधिक मात्रा में पीकर उसके प्रति आदर प्रकट करते हैं, तब स्वर्ग से सात किरणें वास्तव में उत्पन्न करते हैं. स्तुति की जाती हुई सूर्यकिरणें दिन में भी मनुष्यों को ज्ञान कराती हैं. (३) स्वर् यद्देदि सुदृशीकमर्कैर्महि ज्योती रुरुचुर्यद्ध वस्तोः. अन्धा तमांसि दुधिता विचक्षे नृभ्यश्चकार नृतमो अभिष्टौ.. (४) जब महान् एवं तेजरूप स्वर्ग किरणों से भली प्रकार दिखाई देने लगता है, तब देवगण उस स्वर्ग में रहने के लिए दीप्तियुक्त होते हैं. उत्तम नेता सूर्य ने आकर मनुष्यों के ठीक से देखने के लिए घने अंधकारों को नष्ट कर दिया है. (४) ववक्ष इन्द्रो अमितमृजीष्य्१ भे आ पप्रौ रोदसी महित्वा. अतश्चिदस्य महिमा वि रेच्यभि यो विश्वा भुवना बभूव.. (५) सोम वाले इंद्र असीमित महिमा धारण करते हैं एवं अपनी महिमा से धरती-आकाश को भर देते हैं. इंद्र ने सारे संसार को पराजित कर दिया है, इसलिए इनकी महिमा सबसे अधिक है. (५) विश्वानि शक्रो नर्याणि विद्वानपो रिरेच सखिभिर्निकामैः. अश्मानं चिद्ये बिभिदुर्वचोभिर्व्रजं गोमन्तमुशिजो वि वव्रुः.. (६) ebook converter DEMO Watermarks*