ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 710, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे धन के स्वामी इंद्र! व्यंस नामक राक्षस ने मतवाला बनकर तुम पर आक्रमण किया एवं तुम्हारी नाक और ठोड़ी पर चोट की. इसके बाद तुम अधिक शक्तिशाली बन गए एवं तुमने अपने वज्र से उसका सिर काट दिया. (९) गृष्टिः ससूव स्थविरं तवागामनाधृष्यं वृषभं तुम्रमिन्द्रम्. अरीळ्हं वत्सं चरथाय माता स्वयं गातुं तन्व इच्छमानम्.. (१०) एक बार ब्याई हुई गाय जिस प्रकार बछड़े को जन्म देती है, उसी प्रकार अदिति ने अपनी इच्छा से कामवर्षी एवं अजेय इंद्र को जन्म दिया. वे अधिक अवस्था वाले, बलसंपन्न, प्रेरणा करने वाले एवं चलने के लिए शरीर के इच्छुक हैं. (१०) उत माता महिषमन्ववेनदमी त्वा जहति पुत्र देवाः. अथाब्रवीद्वृत्रमिन्द्रो हनिष्यन्त्सखे विष्णो वितरं वि क्रमस्व.. (११) माता अदिति अपने महान् पुत्र इंद्र से पूछने लगी—“हे पुत्र! ये देवगण तुम्हारा त्याग कर रहे हैं.” इसे सुनकर इंद्र ने विष्णु से कहा—“हे मित्र विष्णो! तुम पराक्रम करके वृत्र को मारो.” (११) कस्ते मातरं विधवामचक्रच्छयुं कस्त्वामजिघांसच्चरन्तम्. कस्ते देवो अधि मार्डीक आसीद्यत्प्राक्षिणाः पितरं पादगृह्य.. (१२) हे इंद्र! तुम्हारी माता को विधवा किसने बनाया? तुम्हारे सोते समय तुम्हें किसने मारने की इच्छा की थी? तुम्हारी अपेक्षा सुख देने वाला देव कौन सा है? किसने तुम्हारे पिता के पैर पकड़कर उनकी हत्या की? (१२) अवर्त्या शुन आन्त्राणि पेचे न देवेषु विविदे मर्डितारम्. अपश्यं जायाममहीयमानामधा मे श्येनो मध्वा जभार.. (१३) हमने खाने योग्य वस्तुओं के न होने पर कुत्ते की आंतों को पकाया था. उस समय कोई देव हमारी रक्षा करने वाला नहीं मिला. हम अपनी पत्नी को अपमानित होता देखते रहे. हमें केवल इंद्र ने ही आनंदित किया. (१३) सूक्त—१९ देवता—इंद्र एवा त्वामिन्द्र वज्रिन्नत्र विश्वे देवासः सुहवास ऊमाः. महामुभे रोदसी वृद्धमृष्वं निरेकमिद्वृणते वृत्रहत्ये.. (१) हे वज्रधारी इंद्र! इस यज्ञ में आए हुए समस्त देवगण भली प्रकार बुलाए गए एवं रक्षा करने में समर्थ हैं. वे आकाश एवं पृथ्वी के साथ वृत्रनाश के लिए तुम्हें ही बुलाते हैं. तुम ebook converter DEMO Watermarks*