ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 709, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंके मूल्य वाले सोमरस को पिया।” (३) किं स ऋधक्कू्णवद्यं सहस्रं मासो जभार शरदश्च पूर्वीः. नही न्वस्य प्रतिमानमस्त्यन्तर्जातेषूत ये जनित्वाः.. (४) “अदिति इंद्र को सैकड़ों मासों और वर्षों तक गर्भ में रखे रही. इंद्र ने यह नियम के प्रतिकूल कार्य क्यों किया?” इसे सुनकर अदिति ने उत्तर दिया—“हे वामदेव! जो लोग उत्पन्न हो चुके हैं अथवा भविष्य में होंगे, उन में से किसी के भी साथ इंद्र की समानता नहीं हो सकती.” (४) अवद्यमिव मन्यमाना गुहाकरिन्द्रं माता वीर्येणा न्युष्टम्. अथोदस्थात्स्वयमत्कं वसान आ रोदसी अपृणाज्जायमानः.. (५) अंधेरे सूतिका घर में पैदा होने वाले इंद्र को निंदा के योग्य समझकर माता अदिति ने परम शक्तिशाली बना दिया. इंद्र अपने तेज को धारण करके उठ खड़े हुए और जन्म लेते ही उन्होंने धरती-आकाश को घेर लिया. (५) एता अर्षन्त्यललाभवन्तीर्ऋतावरीरिव सङ्क्रोशमानाः. एता वि पृच्छ किमिदं भनन्ति कमापो अद्रिं परिधिं रुजन्ति.. (६) पानी से भरी हुई नदियां इस प्रकार गर्जन करती हुई बह रही हैं, जैसे इंद्र की महत्ता का घोष कर रही हैं. उनसे पूछो कि ये क्या कहती हैं? इंद्र ने जल को रोकने वाले मेघ को भेदा था. क्या वे नदियां उसी का वर्णन कर रही हैं? (६) किमु ष्विदस्मै निविदो भनन्तेन्द्रस्यावद्यं दिधिषन्त आपः. ममैतान्पुत्रो महता वधेन वृत्रं जघन्वाँ असृजद्वि सिन्धून्.. (७) इंद्र को जो ब्रह्महत्या का पाप लगा है, उस संबंध में विद्वानों का क्या कहना है? यह पाप जल में फेन रूप से उपस्थित है. मेरे पुत्र इंद्र ने बलपूर्वक वज्र चलाकर वृत्र को मारा. इसके बाद नदियों को बहाया. (७) ममच्चन त्वा युवतिः परास ममच्चन त्वा कुषवा जगार. ममच्चिदापः शिशवे ममृर्युर्ममच्चिदिन्द्रः सहसोदतिष्ठत्.. (८) वामदेव कहने लगे—“हे इंद्र! मतवाली युवती माता अदिति ने तुम्हें जन्म दिया. इसी समय कुषवा नाम की राक्षसी ने मतवाली बनकर तुम्हें निगल लिया. जलों से मस्त होकर तुम्हें सुख पहुंचाया. इंद्र प्रसन्न होकर सूतिकागृह में ही उस राक्षसी को मारने लगे.” (८) ममच्चन ते मघवन्व्यंसो निविविध्वाँ अप हनू जघान. अधा निविद्ध उत्तरो बभूवाञ्छिरो दासस्य सं पिणग्वधेन.. (९) ebook converter DEMO Watermarks*