भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 708, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 708

सकता. (१९) एवा न इन्द्रो मघवा विरप्शी करत्सत्या चर्षणीधृदनर्वा. त्वं राजा जनुषां धेह्यस्मे अधि श्रवो माहिनं यज्जरित्रे.. (२०) हे धन के स्वामी, प्रजाओं को धारण करने वाले, शत्रुरहित एवं भांति-भांति के शब्दों से युक्त इंद्र! तुम हमारी स्तुति को सत्य करो. तुम सभी जन्मधारियों के राजा हो. तुम स्तोता को जो यश देते हो, वह अधिक मात्रा में हमें दो. (२०) नू ष्टुत इन्द्र नू गृणान इषं जरित्रे नद्यो३ न पीपे:. अकारि ते हरिवो ब्रह्म नव्यं धिया स्याम रथ्य: सदासा:.. (२१) हे इंद्र! जिस प्रकार जल नदी को पूर्ण करता है, उसी प्रकार तुम पूर्ववर्ती ऋषियों को तथा हमारी स्तुतियों को स्वीकार करके हमारी अन्नवृद्धि करो. हे हरि नामक घोड़ों के स्वामी इंद्र! हमने तुम्हारे निमित्त नई स्तुतियां बनाई हैं. हम रथ के स्वामी एवं तुम्हारे सेवक बनें. (२१) सूक्त—१८ देवता—इंद्र अयं पन्था अनुवित्तः पुराणो यतो देवा उदजायन्त विश्वे. अतश्चिदा जनिषीष्ट प्रवृद्धो मा मातरममुया पत्तवे कः.. (१) इंद्र बोले—"योनि से जन्म लेने का मार्ग परंपरागत एवं सनातन है. समस्त देव एवं मनुष्य उसी मार्ग से निकले हैं. गर्भ में वृद्धि प्राप्त करने वाले तुम भी इसी मार्ग से जन्म लो. दूसरा मार्ग अपना कर माता की मृत्यु का काम मत करो." (१) नाहमतो निरया दुर्गहैतत्तिरश्चता पार्श्वान्निर्गमाणि. बहूनि मे अकृता कत्वानि युध्यै त्वेन सं त्वेन पृच्छै.. (२) वामदेव ने कहा—"हम इस दुर्गम योनि-मार्ग से जन्म नहीं लेंगे. हम तिरछे होकर बगल से निकलेंगे. हमें बहुत से बिना किए हुए काम करने हैं—किसी के साथ युद्ध एवं किसी के साथ वादविवाद." (२) परायतीं मातरमन्वचष्ट न नानु गान्यनु नू गमानि. त्वष्टुर्गृहे अपिबत्सोममिन्द्रः शतधन्यं चम्वोः सुतस्य.. (३) इंद्र बोले—"यदि हम पुरातन योनि-मार्ग से नहीं निकलेंगे तो हमारी माता मर जाएगी. इस प्रकार हम शीघ्र बाहर निकलेंगे." वामदेव कहने लगे—"इंद्र ने त्वष्टा के घर में पत्थरों द्वारा निचोड़े गए एवं सैकड़ों रत्नों ebook converter DEMO Watermarks*

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