भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 707, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 707

शत्रुनाशकर्त्ता इंद्र समस्त पापों का नाश करते एवं अपने स्तुतिकर्त्ता को धन देते हैं. (१३) अयं चक्रमिषणत्सूर्यस्य न्येतशं रीरमत्ससृमाणम्. आ कृष्ण ईं जुहुराणो जिघर्ति त्वचो बुध्ने रजसो अस्य योनौ.. (१४) इंद्र ने सूर्य के चक्र नामक आयुध को रोका एवं स्तुति करने वाले एतश ऋषि की रक्षा की. काले रंग व टेढ़ी चाल वाले बादल ने तेज के मूल एवं जल के उत्पत्ति स्थान आकाश में विराजमान इंद्र को भिगोया. (१४) असिकन्यां यजमानो न होता.. (१५) जिस प्रकार यजमान रात में भी इंद्र को हव्य देता है, उसी प्रकार इंद्र भी उसे धन एवं ऐश्वर्य प्रदान करता है. (१५) गव्यन्त इन्द्रं सख्याय विप्रा अश्वायन्तो वृषणं वाजयन्तः. जनीयन्तो जनिदामक्षितोतिमा च्यावायामोऽवते न कोशम्.. (१६) हम मेधासंपन्न स्तोतागण गायों, घोड़ों, अन्न एवं स्त्री की अभिलाषा करते हैं. कुएं से पानी निकालने के लिए लोग जिस प्रकार पात्र को नीचा करते हैं, उसी प्रकार हम कामवर्षी, पत्नी देने वाले एवं अमित रक्षा करने वाले की मित्रता पाने के लिए झुकते हैं. (१६) त्राता नो बोधि ददृशान आपिरभिख्याता मर्डिता सोम्यानाम्. सखा पिता पितृतमः पितॄणां कर्तेमु लोकमुशते वयोधाः.. (१७) हे विश्वास योग्य, रक्षक, सर्वदर्शी, उपदेशकत्र्त्ता एवं सोमयाजी लोगों को सुख देने वाले इंद्र! तुम मित्र, पिता, बाबा, पितरों को बनाने वाले एवं स्वर्ग की अभिलाषा करने वाले यजमानों को अन्न देते हो. (१७) सखीयतामविता बोधि सखा गृणान इन्द्र स्तुवते वयो धाः. वयं ह्या ते चकृमा सबाध आभिः शमीभिर्महयन्त इन्द्र.. (१८) हे इंद्र! हम तुम्हारी मित्रता के इच्छुक हैं. हमारी रक्षा करो. हमारी स्तुति सुनकर तुम हमारे मित्र बनो तथा स्तोताओं को अन्न दो. हे इंद्र! हम बाधा उपस्थित होने पर भी तुम्हारी स्तुति करते हैं एवं तुम्हारी पूजा करते हैं. (१८) स्तुत इन्द्रो मघवा यद्ध वृत्रा भूरीण्येको अप्रतीनि हन्ति. अस्य प्रियो जरिता यस्य शर्मन्नकिर्देवा वारयन्ते न मर्ताः.. (१९) युद्ध में हमारी स्तुति सुनकर इंद्र अकेले ही बहुत से शत्रुओं को मार डालते हैं. इंद्र स्तुतिकर्त्ताओं को प्रेम करते हैं. स्तुतिकर्त्ता के कल्याण को कोई भी देव या मानव नहीं रोक ebook converter DEMO Watermarks*