ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 706, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसत्राहाणं दाधृषिं तुम्रमिन्द्रं महामपारं वृषां सुवज्रम्. हन्ता यो वृत्रं सनितोत वाजं दाता मघानि मघवा सुराधाः.. (८) हम स्तुतिकर्त्ता बहुत से शत्रुओं के हंता, धर्षक, प्रेरक, महान्, विनाशरहित, कामवर्षी एवं शोभन वज्र धारण करने वाले इंद्र की स्तुति करते हैं. वे वृत्र असुर को मारने वाले, अन्न देने वाले, शोभन धनयुक्त एवं धनदानकर्त्ता हैं. (८) अयं वृतश्चातयते समीचीर्य आजिषु मघवा शृण्व एकः. अयं वाजं भरति यं सनोत्यस्य प्रियासः सख्ये स्याम.. (९) धन के स्वामी इंद्र संग्रामों में अद्वितीय सुने जाते हैं. वे एकत्र शत्रु सेनाओं को नष्ट कर देते हैं एवं यजमानों को देने योग्य अन्न को धारण करते हैं. हम इंद्र के मित्र बनकर प्रिय हों. (९) अयं शृण्वे अध जयन्नुत घ्नन्नयमुत प्र कृणुते युधा गाः. यदा सत्यं कृणुते मन्युमिन्द्रो विश्वं दृढ़हं भयत एजदस्मात्.. (१०) यह सुना जाता है कि इंद्र शत्रुओं के विजेता एवं विनाशक हैं. यह युद्ध के द्वारा शत्रुओं को मारते हुए गाएं छीन लेते हैं. इंद्र जब वास्तव में क्रोध धारण करते हैं, तब समस्त स्थावर एवं जंगम डर जाता है. (१०) समिन्द्रो गा अजयत्सं हिरण्या समश्विया मघवा यो ह पूर्वीः. एभिर्नृभिर्नृतमो अस्य शाकै रायो विभक्ता सम्भरश्च वस्वः.. (११) धनस्वामी इंद्र ने असुरों को जीता. उनके रमणीय धन, अश्वसमूह एवं सेनाओं की जीता. इंद्र अपनी शक्तियों द्वारा सभी मनुष्यों में श्रेष्ठ, स्तोताओं की स्तुति सुनकर धन को बांटने वाले एवं धन धारणकर्त्ता हैं. (११) कियत्स्विदिन्द्रो अध्येति मातुः कियत्पितुर्जनितुर्यो जजान. यो अस्य शुष्मं मुहुकैरियर्ति वातो न जूतः स्तनयद्भिरभ्रैः.. (१२) इंद्र अपने माता एवं पिता के पास से कितना अधिक बल प्राप्त करते हैं? इंद्र ने अपने पिता प्रजापति के पास से इस संसार को उत्पन्न किया है एवं उनके पास से बार-बार संसार का बल प्राप्त करते हैं. स्तोता हवि देने के लिए इंद्र को इस प्रकार बुलाते हैं, जैसे हवा बादलों को प्रेरित करती है. (१२) क्षियन्तं त्वमक्षियन्तं कृणोतीर्यर्ति रेणुं मघवा समोहम्. विभञ्जनुरशनिमाँ इव द्यौरुत स्तोतारं मघवा वसो धात्.. (१३) हे धनस्वामी इंद्र! तुम निर्धन को धनवान् बनाते हो. वज्रधारी, आकाश के समान व ebook converter DEMO Watermarks*