भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 705, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 705

ऋघायन्त सुभ्व१ः पर्वतास आर्धन्न्वनानि सरयन्त आपः.. (२) हे दीप्तिशाली इंद्र! तुम्हारे जन्म के समय भय से धरती-आकाश कांप उठे थे, महान् मेघों ने तुम्हारे अधीन होकर प्राणियों की प्यास मिटाई थी एवं जलहीन मरुप्रदेशों में जल बहाया था. (२) भिनद्गिरिं शवसा वज्रमिष्णन्नाविष्कृण्वानः सहसान ओजः. वधीद्वृत्रं वज्रेण मन्दसानः सरन्नापो जवसा हतवृष्णीः.. (३) शत्रुओं को हराने वाले इंद्र ने अपना तेज प्रकाशित करते हुए वज्र चलाकर शक्ति द्वारा पर्वतों का भेदन किया. इंद्र ने सोमपान से प्रसन्न होकर वज्र द्वारा वृत्र राक्षस का वध किया. वृत्र के वध के बाद जल वेग से बहने लगा. (३) सुवीरस्ते जनिता मन्यत द्यौरिन्द्रस्य कर्ता स्वपस्तमो भूत्. य ईं जजान स्वर्यं सुवज्रमनपच्युतं सदसो न भूम.. (४) हे स्तुति योग्य, उत्तम वज्र से युक्त, स्वर्ग से च्युत न होने वाले एवं महत्त्वशाली इंद्र! तुम्हें जन्म देने वाले प्रजापति ने स्वयं उत्तम पुत्र वाला माना. इंद्र को जन्म देने वाले प्रजापति का यह कर्म अत्यंत उत्तम हुआ. (४) य एक इच्च्यावयति प्र भूमा राजा कृष्टीनां पुरुहूत इन्द्रः. सत्यमेनमनु विश्वे मदन्ति रातिं देवस्य गृणतो मघोनः.. (५) समस्त प्रजाओं के राजा, अनेक लोगों द्वारा बुलाए गए एवं देवों में प्रमुख इंद्र शत्रुओं का भय नष्ट करते हैं. सभी यजमान धन के स्वामी एवं स्तुति करने वाले बंधु सहसा इंद्रदेव को लक्ष्य करके स्तुति करते हैं. (५) सत्रा सोमा अभवन्नस्य विश्वे सत्रा मदासो बृहतो मदिष्ठाः. सत्राभवो वसुपतिर्वसूनां दत्रे विश्वा अधिथा इन्द्र कृष्टीः.. (६) यह सत्य है कि सभी सोम इंद्र के हैं. यह भी सत्य है कि नशा करने वाले सोम महान् इंद्र को बहुत प्रसन्न करते हैं. यह भी सत्य है कि इंद्र न केवल धन के अपितु पशु आदि समस्त संपत्तियों के स्वामी हैं. हे इंद्र! तुम धन के लिए समस्त प्रजाओं को धारण करते हो. (६) त्वमध प्रथमं जायमानोऽमे विश्वा अधिथा इन्द्र कृष्टीः. त्वं प्रति प्रवत आशयानमहिं वज्रेण मघवन्वि वृश्चः.. (७) हे इंद्र! तुमने पूर्वकाल में उत्पन्न होकर वृत्र के भय से सभी प्रजाओं की रक्षा की थी. तुमने स्थलों को जलपूर्ण करने के उद्देश्य से जलनिरोधक वृत्र को वज्र से काट दिया था. (७) ebook converter DEMO Watermarks*