ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 715, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहमारे साथ प्रसन्न होने वाले, शूर, वृद्धि को प्राप्त, प्रभूत-बलसंपन्न एवं सूर्य के समान शत्रुप्रभावकारी व शक्ति को बढ़ाने वाले इंद्र हमारी स्तुतियां सुनकर हमारी रक्षा के लिए यहां यज्ञ में पधारें. (१) तस्येदिह स्तवथ वृष्ण्यानि तुविद्युम्नस्य तुविराधसो नॄन्. यस्य क्रतुर्विदथ्यो३ न सम्राट् साह्वान्तरुत्रो अभ्यस्ति कृष्टीः.. (२) हे स्तोताओ! तुम इस यज्ञ में नेता मरुतों की स्तुति करो, जो इंद्र के बलस्वरूप हैं. अतिशय यशस्वी एवं असीमित धनसंपन्न इंद्र का शत्रुओं को हराने वाला एवं भक्तों की रक्षा करने वाला कर्म शत्रु की प्रजाओं को उसी प्रकार पराभूत कर देता है, जिस प्रकार यज्ञ की योग्यता रखने वाला राजा सबको हराता है. (२) आ यात्विन्द्रो दिव आ पृथिव्या मक्षू समुद्रादुत वा पुरीषात्. स्वर्णरादवसे नो मरुत्वान् परावतो वा सदनादृतस्य.. (३) हम लोगों की रक्षा के निमित्त इंद्र मरुतों के साथ स्वर्ग, धरती, अंतरिक्ष, जल, आदित्य मंडल, दूरवर्ती स्थान अथवा जल के स्थान मेघ से यहां आवें. (३) स्थूरस्य रायो बृहतो य ईशे तमु ष्टवाम विथेग्विन्द्रम्. यो वायुना जयति गोमतीषु प्र धृष्णुया नयति वस्यो अच्छ.. (४) हम स्थूल एवं विशाल धन के स्वामी, प्राणवायु रूप बल द्वारा शत्रु सेना को विजय करने वाले, प्रगल्भ एवं स्तुतिकर्त्ताओं को उत्तम धन प्रदान करने वाले इंद्र को लक्ष्य करके स्तुति करते हैं. (४) उप यो नमो नमसि स्तभायन्नियर्ति वाचं जनयन्यजध्यै. ऋञ्जसानः पुरुवार उक्थैरेन्द्रं कृण्वीत सदनेषु होता.. (५) समस्त लोकों का स्तंभन करके, यज्ञ के निमित्त गर्जनरूपी ध्वनि करने वाले, हव्य ग्रहण करके वर्षा द्वारा लोगों को अन्न देने वाले एवं उत्तम स्तोत्रों द्वारा स्तुति करने योग्य इंद्र को हम बुलाते हैं. (५) धिषा यदि धिषण्यन्तः सरण्यान्तसदन्तो अद्रिमौशिजस्य गोहे. आ दुरोषाः पास्त्यस्य होता यो नो महान्त्संवरणेषु वह्निः.. (६) इंद्र की स्तुति के इच्छुक एवं यजमान के घर में रहने वाले स्तोताओं के स्तुति करते हुए समीप उपस्थित होते ही इंद्र आवें एवं युद्ध में हम लोगों के सहायक हों. इंद्र यजमानों के होता एवं असहनीय क्रोध वाले हैं. (६) सत्रा यदीं भार्वरस्य वृष्णः सिषक्ति शुष्मः स्तुवते भराय. ebook converter DEMO Watermarks*