ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 717, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंब्रह्म स्तोमं मघवा सोममुक्था यो अश्मानं शवसा बिभ्रदेति.. (१) जो महान् एवं शक्तिशाली इंद्र हमारे हव्य अन्न का सेवन करते हैं एवं उसकी अभिलाषा करते हैं, वे धन के स्वामी हैं. बलपूर्वक वज्र को धारण करके आने वाले इंद्र हव्य, अन्न, स्तुतिसमूह, सोमरस एवं उक्थ को स्वीकार करते हैं. (१) वृषा वृषन्धिं चतुरश्रिमस्यन्नुग्रो बाहुभ्यां नृतमः शचीवान्. श्रिये परुष्णीमुषणाम ऊर्णां यस्याः पर्वाणि सख्याय विव्ये.. (२) कामवर्षी, उग्र, नेताओं में श्रेष्ठ एवं कर्म करने वाले इंद्र दोनों हाथों से चार धारों वाले एवं वर्षकारक वज्र को शत्रुओं के ऊपर फेंकते हैं. वे आच्छादन करने वाली उस परुष्णी नदी का आश्रय पाने के लिए सेवा करते हैं जो मैत्री कार्य के लिए भिन्न-भिन्न प्रदेशों को घेरती है. (२) यो देवो देवतमो जायमानो महो वाजेभिर्महद्भिश्च शुष्मैः. दधानो वज्रं बाह्वोरुशन्तं द्याममेन रेजयत्प्र भूम.. (३) दाताओं में श्रेष्ठ एवं दीप्तिशाली जो इंद्र उत्पन्न होते ही महान् अन्न एवं बल से युक्त हुए थे, वे दोनों भुजाओं में अपने अभिलषित वज्र को धारण करके अपनी शक्ति से धरती एवं आकाश को कंपित करते थे. (३) विश्वा रोधांसि प्रवतश्च पूर्वीर्द्यौरृंऋष्वाज्जनिम्नेजत क्षा. आ मातरा भरति शुष्म्यो गोर्नृवत्परिज्मन्नोनुवन्त वाताः.. (४) इंद्र के जन्म के समय ही समस्त उन्नत प्रदेश, पर्वत, अनेक सागर, धरती और आकाश उनके भय से कांपने लगे थे. बलशाली इंद्र गतिशील सूर्य के माता-पिता रूप धरती-आकाश को धारण करते हैं. इंद्र की प्रेरणा से वायु मनुष्यों के समान शब्द करती है. (४) ता तू त इन्द्र महतो महानि विश्वेष्वित्सवनेषु प्रवाच्या. यच्छूर धृष्णो धृषता दधृष्वानहिं वज्रेण शवसाविवेषीः.. (५) हे महान् इंद्र! तुम महान् हो और तुम हमारे तीनों सवनों में स्तुति करने योग्य हो. हे प्रगल्भ, शूर एवं समस्त लोकों को धारण करने वाले इंद्र! तुमने शत्रुओं को पराजित करने वाले वज्र द्वारा बलपूर्वक अहि राक्षस को नष्ट किया था. (५) ता तू ते सत्या तुविनृम्ण विश्वा प्र धेनवः सिस्रते वृष्ण ऊध्नः. अधा ह त्वद्वृषमणो भियानाः प्र सिन्धवो जवसा चक्रमन्त.. (६) हे अधिक बलशाली इंद्र! तुम्हारे वे सारे काम निश्चित रूप से सत्य हैं. हे कामवर्षी इंद्र! तुम्हारे डर से सभी गाएं अपने थनों से अधिक मात्रा में दूध टपकाती हैं. हे कामवर्षी हृदय वाले इंद्र! तुम्हारे डर से नदियां अधिक वेग से बहती हैं. (६) ebook converter DEMO Watermarks*