भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 722, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 722

हैं. (७) यदा समर्यं व्यचेद्घावा दीर्घं यदाजिमभ्यख्यदर्यः. अचिक्रदद् वृषणं पत्न्यच्छा दुरोण आ निशितं सोमसुद्भिः.. (८) शत्रुओं को मारने वाले महान् इंद्र संग्राम में जब शत्रुओं को जानकर दीर्घ काल तक संलग्न रहते हैं, उस समय इंद्र की पत्नी यज्ञशाला में ऐसे इंद्र को बुलाती है जो ऋत्विज् द्वारा निचोड़े गए सोमरस को पीकर उत्तेजित हो जाते हैं एवं मनोकामनाएं पूरी करते हैं. (८) भूयसा वस्नमचरत्कनीयोऽविक्रीतो अकानिषं पुनर्यन्. स भूयसा कनीयो नारिरेचीद्दीना दक्षा वि दुहन्ति प्र वाणम्.. (९) किसी व्यक्ति को अधिक द्रव्य का थोड़ा मूल्य मिला. वह खरीदार से बोला—"मैं ने यह वस्तु नहीं बेची. अभी मुझे और मूल्य दो." खरीदने वाले ने मूल्य नहीं बढ़ाया और कहा—"मैं बहुत देख चुका हूं. समर्थ या असमर्थ कैसा भी व्यक्ति हो, बेचते समय जो मूल्य निश्चित हो जाता है, उसी पर जमा रहता है." (९) क इमं दशभिर्ममेंद्रं क्रीणाति धेनुभिः. यदा वृत्राणि जंघनदथैनं मे पुनर्ददत्.. (१०) मेरे इस इंद्र को दस गायों के बदले कौन मोल लेता है? शर्त यह है कि जब इंद्र तुम्हारे शत्रुओं का वध कर चुके हों तो इन्हें लौटा देना. (१०) नू ष्टुत इन्द्र नू गृणान इषं जरित्रे नद्यो३ न पीपेः. अकारि ते हरिवो ब्रह्म नव्यं धिया स्याम रथ्यः सदासाः.. (११) हे इंद्र! जिस प्रकार जल सरिता को पूर्ण करता है, उसी प्रकार तुम पूर्ववर्ती ऋषियों की तथा हमारी स्तुतियां सुनकर उन्हें स्वीकार करो एवं हमारा अन्न बढ़ाओ. हे हरि नामक घोड़ों के स्वामी इंद्र! हमने तुम्हारे निमित्त नवीन स्तुतियां बनाई हैं. हम रथ के स्वामी एवं तुम्हारे सेवक बनें. (११) सूक्त—२५ देवता—इंद्र को अद्य नर्यो देवकाम उशन्निन्द्रस्य सख्यं जुजोष. को वा महेऽवसे पार्याय समिद्धे अग्नौ सुतसोम ईट्टे.. (१) आज कौन मानवहितैषी, देवाभिलाषी एवं कामनापूर्ण मनुष्य इंद्र के साथ मित्रता करना चाहता है? सोमरस निचोड़ने वाला कौन सा यजमान अग्नि प्रज्वलित होने पर महान् तथा पार पहुंचाने वाले आश्रय के लिए इंद्र की स्तुति करता है? (१) ebook converter DEMO Watermarks*