भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 743, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 743

हे सुंदर ऋभुओ एवं वाजगण! जिस प्रकार तुम दिवसों को शोभन बनाने के लिए मनुष्यों का यज्ञ धारण करते हो, उसी प्रकार देवमार्गों द्वारा हमारे यज्ञ में आओ. (१) ते वो हृदे मनसे सन्तु यज्ञा जुष्टासो अद्य घृतनिर्णिजो गुः. प्र वः सुतासो हरयन्त पूर्णाः क्रत्वे दक्षाय हर्षयन्त पीताः.. (२) आज हमारे वे सभी यज्ञ तुम्हारे मन को प्रसन्न करने वाले बनें एवं घी से मिला हुआ सोमरस तुम्हें प्राप्त हो. चमस में भरा हुआ सोमरस तुम्हारी इच्छा करता है. वह पीने के पश्चात् तुम्हें यज्ञकर्म के लिए प्रेरित करे. (२) त्र्युदायं देवहितं यथा वः स्तोमो वाजा ऋभुक्षणो ददे वः. जुह्वे मनुष्यदुपरासु विक्षु युष्मे सचा बृहद्दिवेषु सोमम्.. (३) हे वाजगण एवं ऋभुगण! तीनों सवनों में पीने योग्य एवं देवहितकारी सोम को जो लोग तुम्हें देते हैं, इसी प्रकार के लोगों के बीच एकत्र होकर एवं परम दिव्य प्रकाशयुक्त देवों के मध्य मनु के समान बनकर हम तुम्हारे उद्देश्य से सोम धारण करते हैं. (३) पीवोअश्वाः शुचद्रथा हि भूतायः शिप्रा वाजिनः सुनिष्काः. इन्द्रस्य सूनो शवसो नपातोऽनु वश्चेत्यग्रियं मदाय.. (४) हे ऋभुओ! तुम स्वस्थ घोड़ों एवं दीप्तियुक्त रथ वाले हो. तुम्हारी ठोड़ियां लोहे के समान हैं. तुम अन्न के स्वामी एवं उत्तम दानशील हो. हे इंद्र के पुत्रो एवं बल की संतानो! यह प्रातःकाल का यज्ञ तुम्हारी प्रसन्नता के लिए किया गया है. (४) ऋभुमृभुक्षणो रयिं वाजे वाजिन्तमं युजम्. इन्द्रस्वन्तं हवामहे सदासातममश्विनम्.. (५) हे ऋभुओ! हम अत्यंत रूप से बढ़ने वाले धन, संग्राम में परम शक्तिशाली रक्षक तथा सदा दानशील, अश्वों से युक्त एवं इंद्र से संबंधित तुम्हारे गण को पुकारते हैं. (५) सेद्भवो यमवथ यूयमिन्द्रश्च मर्त्यम्. स धीभिरस्तु सनिता मेधसाता सो अर्वता.. (६) हे ऋभुओ! तुम एवं इंद्र जिस व्यक्ति की रक्षा करते हो, वही श्रेष्ठ बुद्धियों से युक्त एवं यज्ञ में अश्वयुक्त बनता है. (६) वि नो वाजा ऋभुक्षणः पथश्चितन यष्टवे. अस्मभ्यं सूरयः स्तुता विश्वा आशास्तरीषणि.. (७) हे वाजगण एवं ऋभुओ! हमें यज्ञ का मार्ग बताओ. हे मेधावियो! हमें अपनी स्तुति के बदले सारी दिशाओं को जीतने वाला बल दो. (७) ebook converter DEMO Watermarks*