भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 750, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 750

ऋतुं सचन्ते वरुणस्य देवा राजामि कृष्टेरुपमस्य वव्रेः.. (१) क्षत्रिय जाति में उत्पन्न एवं समस्त प्रजाओं के स्वामी हम लोगों का राज्य दो प्रकार का है. समस्त देव हमारे हैं, जैसे कि सारी प्रजा हमारी है. रूपवान् एवं समस्त प्रजाओं के धारणकर्त्ता हम लोगों के यज्ञ की सेवा देव करते हैं. हम सबसे श्रेष्ठ हैं. (१) अहं राजा वरुणो मह्यं तान्यसुर्याणि प्रथमा धारयन्त. क्रतुं सचन्ते वरुणस्य देवा राजामि कृष्टेरुपमस्य वव्रेः.. (२) हम ही राजा वरुण हैं. देवगण असुरनाशकारी श्रेष्ठ-बल हमारे लिए ही धारण करते हैं. रूपवान् एवं समस्त प्रजाओं के धारणकर्त्ता हम लोगों के यज्ञ की सेवा देव करते हैं. हम सबसे श्रेष्ठ हैं. (२) अहमिन्द्रो वरुणस्ते महित्वोर्वी गभीरे रजसी सुमेके. त्वष्टेव विश्वा भुवनानि विद्वान्तस्मैरयं रोदसी धारयं च.. (३) हम ही इंद्र और वरुण हैं. महत्ता के कारण विस्तृत, गंभीर एवं सुंदर रूप वाले धरती- आकाश भी हम हैं. विद्वान् हम त्वष्टा के समान समस्त प्राणियों को प्रेरणा देते हैं एवं धरती- आकाश को धारण करते हैं. (३) अहमपो अपिन्वमुक्षमाणा धारयं दिवं सदन ऋतस्य. ऋतेन पुत्रो अदितेर्ऋतावोत त्रिधातु प्रथयद्वि भूम.. (४) सींचने वाले जल को हमने ही बरसाया था एवं जल के स्थान आकाश को धारण किया था. जल के कारण ही हम अदिति-पुत्र अर्थात् यज्ञ के स्वामी बने थे. हमने ही व्याप्त आकाश को तीन भागों में बांटा था. (४) मां नरः स्वश्वा वाजयन्तो मां वृताः समरणे हवन्ते. कृणोम्याजिं मघवाहमिन्द्र इयर्मि रेणुमभिभूत्योजाः.. (५) सुंदर घोड़ों के स्वामी एवं युद्ध के अभिलाषी नेता हमारे ही पीछे चलते हैं एवं युद्धस्थल में एकत्र होकर हमें ही पुकारते हैं. हम ही इंद्र बनकर युद्ध करते हैं एवं शत्रुपराभवकारी बल से युक्त होकर धूल उड़ाते हैं. (५) अहं ता विश्वा चकरं नकिर्मा दैव्यं सहो वरते अप्रतीतम्. यन्मा सोमासो ममदन्यदुक्थोभे भयेते रजसी अपारे.. (६) सब प्रसिद्ध काम हमने ही किए हैं. देवों के न हारने वाले बल से युक्त होने के कारण हमें कोई नहीं रोक सकता. जब सोमरस एवं स्तुतियां हमें मतवाला कर देती हैं, तब विस्तृत धरती-आकाश भी डर जाते हैं. (६) ebook converter DEMO Watermarks*