भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 770, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 770

वयं नाम प्र ब्रवामा घृतस्यास्मिन्यज्ञे धारयामा नमोभिः. उप ब्रह्मा शृणवच्छस्यमानं चतुः शृङ्गोऽवमीद्गौर एतत्.. (२) हम यजमान घी की प्रशंसा करते हैं एवं उसे इस यज्ञ में आदरपूर्वक धारण करते हैं. ब्रह्मा इस स्तुति को सुनें. गौ देव इस संसार का पालन करते हैं. चारों वेद उनके सींगों के समान हैं. (२) चत्वारि शृङ्गा त्रयो अस्य पादा द्वे शीर्षे सप्त हस्तासो अस्य. त्रिधा बद्धो वृषभो रोरवीति महो देवो मर्त्याँ आ विवेश.. (३) यज्ञात्मक अग्नि के सींगों के समान चार वेद हैं. सवनों के रूप में इसके तीन चरण हैं. ब्रह्मोदन एवं प्रवर्ग्य के रूप में इसके दो सिर हैं. छंदों के रूप में इसके सात हाथ हैं. अभीष्टवर्षी ये अग्नि देवमंत्र, कल्प एवं ब्राह्मण इन तीन बंधनों से बंधे हैं एवं महान् शब्द करते हैं. वे महान् देव मानवों के बीच प्रविष्ट हैं. (३) त्रिधा हितं पणिभिर्गुह्यमानं गवि देवासो घृतमन्वविन्दन्. इन्द्र एकं सूर्य एकं जजान वेनादेकं स्वधया निष्टतक्षुः.. (४) असुरों ने गायों में दूध, दही एवं घी तीन पदार्थ छिपाए थे. देवों ने उन्हें खोज लिया. इंद्र एवं सूर्य ने एक-एक पदार्थ उत्पन्न किया. देवों ने कांतिपूर्ण अग्नि से घृत उत्पन्न किया. (४) एता अर्षन्ति हृद्यात्समुद्राच्छतव्रजा रिपुणा नावचक्षे. घृतस्य धारा अभि चाकशीमि हिरण्ययो वेतसो मध्य आसाम्.. (५) आकाश से असीमित गति वाला जल नीचे गिरता है. रोकने वाला शत्रु इसे नहीं देख सकता. हम उसे देख सकते हैं एवं उसके मध्य में छिपी अग्नि को भी देख सकते हैं. (५) सम्यक्स्रवन्ति सरितो न धेना अन्तर्हृदा मनसा पूयमानाः. एते अर्षन्त्युर्मयो घृतस्य मृगा इव क्षिपणोरीषमाणाः.. (६) प्रसन्नता देने वाली नदी के समान ही घी की धाराएं अग्नि पर गिरती हैं. वे हृदय के बीच रहने वाले मन द्वारा पवित्र हैं. व्याध के डर से जिस प्रकार हिरण भागते हैं, उसी प्रकार घी की धाराएं चलती हैं. (६) सिन्धोरिव प्राध्वने शूघनासो वातप्रमियः पतयन्ति यह्वाः. घृतस्य धारा अरुषो न वाजी काष्ठा भिन्दन्नूर्मिभिः पिन्वमानः.. (७) नदी का जल जिस प्रकार निचले स्थान की ओर तेजी से बहता है, उसी प्रकार घी की धाराएं सीमा को पार करके आगे बढ़ती हैं. (७) ebook converter DEMO Watermarks*