भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 783, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 783

ये पत्वभिः शफानां व्रजा भुरन्त गोनामिषं स्तोतृभ्य आ भर.. (७) हे अग्नि! तुम्हारी ये ज्वालाएं अत्यधिक रूप में अन्न स्वामिनी होकर बढ़ें. ये ज्वालाएं पतन के द्वारा खुरों वाली गायों की इच्छा करें. हे अग्नि! तुम स्तुतिकर्त्ताओं के लिए अन्न लाओ. (७) नवा नो अग्न आ भर स्तोतृभ्यः सुक्षितीरिषः. ते स्याम य आनृचुस्त्वादूतासो दमेदमेषं स्तोतृभ्य आ भर.. (८) हे अग्नि! तुम हम स्तोताओं को नए घरों के साथ ही अन्न भी दो. हम लोग प्रत्येक यज्ञशाला में तुम्हारी पूजा करते हुए तुम्हें दूत के रूप में पा सकें. हे अग्नि! तुम स्तुति करने वालों के लिए अन्न लाओ. (८) उभे सुश्चन्द्र सर्पिषो दर्वी श्रीणीष आसनि. उतो न उत्पुपूर्या उक्थेषु शवसस्पत इषं स्तोतृभ्य आ भर.. (९) हे प्रसन्नताकारक अग्नि! तुम अपने मुख में घी से भरे हुए दो चमस धारण करते हो. हे बल के पुत्र अग्नि! तुम यज्ञों में हम लोगों को सफल बनाओ. हे अग्नि! तुम स्तुतिकर्त्ताओं के लिए अन्न लाओ. (९) एवाँ अग्निमजुर्य्यमुर्गीर्भिर्यज्ञेभिरानुषक्. दधदस्मे सुवीर्यमुत त्यदाश्वश्व्यमिषं स्तोतृभ्य आ भर.. (१०) इस प्रकार भक्तजन स्तुतियां एवं यज्ञ लेकर अग्नि के पास जाते हैं तथा उन्हें स्थापित करते हैं. अग्नि हमें उत्तम पुत्र-पौत्रादि सहित तेज चलने वाले घोड़े दें. हे अग्नि! तुम स्तुति करने वालों के लिए अन्न लाओ. (१०) सूक्त—७ देवता—अग्नि सखायः सं वः सम्यञ्चमिषं स्तोमं चाग्नये. वर्षिष्ठाय क्षितीनामूर्जो नप्त्रे सहस्वते.. (१) हे मित्ररूप ऋत्विजो! तुम यजमानों के कल्याण के निमित्त अत्यंत वृद्धिप्राप्त, बल के पुत्र एवं शक्तिशाली अग्नि के लिए अन्न एवं स्तुति प्रदान करो. (१) कुत्रा चिद्यस्य समृत्तौ रण्वा नरो नृषदने. अर्हन्तश्चिद्यमिन्धते सञ्जनयन्ति जन्तवः.. (२) वे अग्नि कहां हैं, जिन्हें यज्ञशाला में पाकर ऋत्विज् प्रसन्न हो जाते हैं, जिन्हें पूजा करके प्रज्वलित किया जाता है एवं जिनके हेतु जंतुओं को उत्पन्न किया जाता है? (२) ebook converter DEMO Watermarks*