भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 791, कुल 1855 में से

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करने वाला यजमान विस्तृत घर प्राप्त करता है. तुम्हारा सेवक कामना पूर्ण करने वाला पुत्र प्राप्त करता है. (६) सूक्त—१३ देवता—अग्नि अर्चन्तस्त्वा हवामहेऽर्चन्तः समिधीमहि. अग्ने अर्चन्त ऊतये.. (१) हे अग्नि! हम तुम्हारी पूजा करते हुए तुम्हें बुलाते हैं एवं तुम्हें प्रज्वलित करते हैं. हम रक्षा के लिए तुम्हारी पूजा करते हैं. (१) अग्नेः स्तोमं मनामहे सिध्रमद्य दिविस्पृशः. देवस्य द्रविणस्यवः.. (२) हम लोग धन की अभिलाषा से दीप्तिशाली एवं आकाश को छूने वाले अग्नि की पुरुषार्थ सिद्ध करने वाली स्तुति करते हैं. (२) अग्निर्जुषत नो गिरो होता यो मानुषेष्वा. स यक्षद्दैव्यं जनम्.. (३) मनुष्यों के बीच स्थित रहकर देवों को बुलाने वाले अग्नि हमारी स्तुतियां स्वीकार करें एवं देवयज्ञ संबंधी सामग्री का वहन करें. (३) त्वमग्ने सप्रथा असि जुष्टो होता वरेण्यः. त्वया यज्ञं वि तन्वते.. (४) हे सदा प्रसन्न होता, लोगों द्वारा वरण करने योग्य एवं पुष्ट अग्नि! यजमान तुम्हारी सहायता से यज्ञ का विस्तार करते हैं. (४) त्वामग्ने वाजसातमं विप्रा वर्धन्ति सुष्टुतम्. स नो रास्व सुवीर्यम्.. (५) हे श्रेष्ठ अन्नदाता एवं भली प्रकार स्तुत अग्नि! बुद्धिमान् होता तुम्हें बढ़ाते हैं. तुम हमें उत्तम बल दो. (५) अग्ने नेमिरराँ इव देवाँस्त्वं परिभूरसि. आ राधश्चित्रमृञ्जसे.. (६) हे अग्नि! पहिए की नेमि जिस प्रकार अरों को अपने में स्थित करती है, उसी प्रकार तुम देवों को पराजित करते हो. तुम स्तोताओं को भली प्रकार धन दो. (६) सूक्त—१४ देवता—अग्नि अग्निं स्तोमेन बोधय समिधानो अमर्त्यम्. हव्या देवेषु नो दधत्.. (१) हे यजमान! अमर-अग्नि को स्तुतियों द्वारा प्रबुद्ध करो. वे प्रज्वलित होकर हमारा हव्य ebook converter DEMO Watermarks*