भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 799, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 799

हे अग्नि! मुझ द्युम्न ऋषि को उत्तम बल से युक्त एवं शत्रुओं को पराजित करने वाला पुत्र दो, जो स्तुति से युक्त होकर युद्ध में सामने आने वाले शत्रुओं को हरा दे. (१) तमग्ने पृतनाषहं रयिं सहस्व आ भर. त्वं हि सत्यो अद्भुतो दाता वाजस्य गोमतः.. (२) हे बलवान् अग्नि! तुम सत्यस्वरूप एवं महान् तथा गोयुक्त अन्न देने वाले हो. मुझे शत्रु सेनाओं को हराने वाला पुत्र दो. (२) विश्वे हि त्वा सजोषसो जनासो वृक्तबर्हिषः. होतारं सदमसु प्रियं व्यन्ति वार्या पुरु.. (३) हे अग्नि! परस्पर प्रसन्न एवं कुश बिछाने वाले सब ऋत्विज् यज्ञशाला में देवों को बुलाने वाले एवं सर्वप्रिय तुमसे उत्तम धन मांगते हैं. (३) स हि ष्मा विश्वचर्षणिर्भिमाति सहो दधे. अग्न एषु क्षयेष्वा रेवन्नः शुक्र दीदिहि द्युमत्पावक दीदिहि.. (४) हे अग्नि! वे विश्व-चर्षण ऋषि शत्रुहिंसक बल धारण करें. हे तेजस्वी अग्नि! हमारे घरों में तुम धनयुक्त प्रकाश करो. हे पापनाशक अग्नि! तुम दीप्तिशाली होकर प्रकाश करो. (४) सूक्त—२४ देवता—अग्नि अग्ने त्वं नो अन्तम उत त्राता शिवो भवा वरूथ्यः.. (१) वसुरग्निर्वसुश्रवा अच्छा नक्षि द्युमत्तमं रयिं दाः.. (२) हे वरणीय, रक्षक एवं सुखकर अग्नि! तुम हमारे समीपवर्ती बनो. हे निवास एवं अन्नदाता अग्नि! तुम हमें प्राप्त होकर हमें अत्यंत उज्ज्वल धन दो. (१, २) स नो बोधि श्रुधी हवमुरुष्या णो अघायतः समस्मात्.. (३) तं त्वा शोचिष्ठ दीदिवः सुम्नाय नूनमीमहे सखिभ्यः.. (४) हे अग्नि! तुम हमें जानो एवं हमारी पुकार सुनो. सभी पाप चाहने वाले लोगों से हमें बचाओ. हे अपने तेज से दीप्त अग्नि! हम तुमसे सुख एवं पुत्र की याचना करते हैं. (३, ४) सूक्त—२५ देवता—अग्नि अच्छा वो अग्निमवसे देवं गासि स नो वसुः. रासत्पुत्र ऋषूणामृतावा पर्षति द्विषः.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*