ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 8, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसायण के समान विस्तृत भाष्य लिखना पड़ता तो संभवतया चालीस वर्ष लगते. मेरे लिए इस अनुवाद की एकमात्र उपलब्धि यही है कि मैं इस बहाने संपूर्ण ऋग्वेद एवं इसका सायण भाष्य पढ़ सका. यदि किसी अन्य व्यक्ति का इस अनुवाद से कोई प्रयोजन सिद्ध हो सके तो मैं अपना प्रयत्न सफल समझूंगा. मेरे स्वयं के प्रमाद अथवा अज्ञान के कारण अथवा मुद्रण संबंधी कमियों के कारण यदि अब भी कुछ त्रुटियां रह गई हों तो उन्हें मैं आगामी संस्करण में सुधारने हेतु कृतसंकल्प हूं. जो महानुभाव इस ओर मार्गनिर्देशन करेंगे उनका मैं आभार मानूंगा. अपनी बात समाप्त करने से पहले मैं यह कहने का लोभ संवरण नहीं कर पा रहा हूं कि ऋग्वेद की एक बात ने मुझे बहुत चकित किया है. उन्नत समाज, विचारशील लोगों एवं सभ्य परिवारों की सभी सामग्री का उल्लेख होते हुए भी कहीं भी दीपक अथवा किसी कृत्रिम प्रकाशसाधन का नाम नहीं मिला. डा. गंगा सहाय शर्मा